मेघालय हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के छह स्टूडेंट्स के खिलाफ FIR रद्द कर दी है जिन पर यहां एक होमस्टे में तोड़फोड़ करने का आरोप है। इन स्टूडेंट्स ने 2.06 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर दिए थे। साथ ही उनमें से दो को 25,000 रुपये देने और छह दिन कम्युनिटी सर्विस करने का भी निर्देश दिया गया था। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह आदेश चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने सोमवार को तब दिया जब दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया, जिसमें होमस्टे मैनेजर और मालिक ने FIR रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
होमस्टे को नुकसान पहुंचाने की शिकायत के बाद 11 जुलाई को लैतुमखरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी।
स्टूडेंट्स पर यह भी आरोप था कि उन्होंने शिकायत करने वाले को धमकाया क्योंकि उन्हें एक कमरे में तय संख्या से ज़्यादा मेहमानों को रहने की इजाज़त नहीं दी गई थी।
आरोपियों ने FIR रद्द करने की मांग करते हुए कोर्ट में अर्जी दी। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों में से तीन नाबालिग हैं – एक 15 साल का और दो 17 साल के – और एक अभी 18 साल का हुआ है। बाकी दो 20 साल के हैं और कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं।
घटना के बाद, सभी छह आरोपियों को 13 जुलाई को पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किया गया और बाद में बेल पर रिहा कर दिया गया।
कोर्ट ने बताया कि बाद में, स्टूडेंट्स के बड़ों और शुभचिंतकों के दखल के बाद, दोनों पार्टियों ने 17 अगस्त को आपसी समझौता कर लिया।
समझौते के तहत, स्टूडेंट्स ने होमस्टे के मालिक को पूरे और आखिरी मुआवजे के तौर पर 2.06 लाख रुपये दिए। उन्होंने अपने बर्ताव और कामों के लिए बिना शर्त माफी भी मांगी।
जस्टिस डेरे ने कहा कि स्टूडेंट्स के भविष्य और भलाई और पार्टियों के बीच समझौते को ध्यान में रखते हुए, FIR रद्द करने में कोई रुकावट नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने दो पिटीशनर्स को एक हफ़्ते के अंदर होमस्टे के मालिक को 25,000 रुपये और देने का निर्देश दिया।
दोनों स्टूडेंट्स को छह दिन की कम्युनिटी सर्विस करने के लिए भी कहा गया।
एक अधिकारी ने कहा, “वे 8 सितंबर से तीन दिन शिलांग के लचुमियर में सिख सेंटर श्री गुरु सिंह सभा में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक डॉ. कमलजीत सिंह की देखरेख में बिताएंगे।”
वे जीवा केयर्स के ‘प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप’ के साथ समय बिताएंगे, जो शहर भर में फूलों और कूड़ेदानों के रखरखाव के अलावा, उमखरा नदी से जुड़े कामों सहित सफाई के काम करता है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि कम्युनिटी सर्विस ठीक से पूरी हुई या नहीं, इस पर एक रिपोर्ट संबंधित पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के ज़रिए जमा की जाए। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि बाकी चार पिटीशनर्स को उनकी उम्र को देखते हुए कम्युनिटी सर्विस नहीं दी गई।
अधिकारियों ने कहा कि मामले को कंप्लायंस रिकॉर्ड करने के लिए 15 सितंबर को लिस्ट किया गया है।


