उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ियों का संज्ञान लेते हुए, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (EROs) को निलंबित कर दिया है। साथ ही, आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को निर्देश दिया है कि इन दो अधिकारियों और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में और अधिक सख्त धाराएं जोड़ी जाएं।
31 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के CEO को लिखे एक पत्र में, चुनाव आयोग ने निर्देश दिया कि राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) और EROs से कहा जाए कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली मतदाता सूचियों की गहन जांच करें। इसमें विशेष रूप से फॉर्म 6, 7 या 8 के माध्यम से किए गए डेटा एंट्री (नाम जोड़ने, हटाने या बदलाव करने) की जांच शामिल है। ECI ने कहा, “इन अधिकारियों की चार्जशीट आगे की समीक्षा के लिए आयोग को भेजी जानी चाहिए। आयोग की पूर्व मंजूरी के बिना इन दोषी अधिकारियों को बहाल नहीं किया जाएगा।”
आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि इन दो अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 198 जोड़ी जाए। आयोग ने CEO से यह सुनिश्चित करने को भी कहा है कि संबंधित अदालत में इन मामलों की सख्ती से पैरवी की जाए, ताकि मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके। ECI ने पीलीभीत के DEO से जिले के सभी चार विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच के संबंध में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है, जिसमें विशिष्ट टिप्पणियां भी शामिल होनी चाहिए।
इसके अलावा, आयोग ने VRC ऑपरेटर के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट और पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में पांच सहायक इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (AEROs) की भूमिका का विवरण तीन दिनों के भीतर मांगा है। यह कार्रवाई उन आरोपों के बाद की गई है, जिनमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पीलीभीत में मतदाता सूची से हजारों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए और उनकी जगह कथित तौर पर फर्जी पहचानें जोड़ दी गईं।


