सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में प्रसाद की चोरी का आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर एक बड़ा फैसला सुनाया। मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं का निपटारा करते हुए, कोर्ट ने निचली अदालत में आगे की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया। अपने फैसले में, कोर्ट ने कहा कि चूंकि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया अब संबंधित निचली अदालत में आगे बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को ट्रायल के दौरान निचली अदालत की मदद करने की भी अनुमति दी।
SIT जांच में 105 संदिग्ध घटनाएं सामने आईं
उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच के लिए बनाई गई SIT ने अपनी जांच पूरी कर ली है और चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में मंदिर में प्रसाद की गिनती के दौरान कथित तौर पर बिना इजाज़त के पैसे हटाने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं में आठ आरोपियों की भूमिका की जांच की गई है। SIT रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में आरोपियों के बैंक अकाउंट में संदिग्ध जमा और प्रॉपर्टी में निवेश से जुड़ी जानकारी मिली है। जांच टीम ने CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल रिकॉर्ड और फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स की जांच की। इस मामले में एक फोरेंसिक ऑडिटर भी शामिल था।
पिटीशनर भी अपना पक्ष रख सकेंगे
सुनवाई के दौरान, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने जांच और चार्जशीट के बारे में कोर्ट को जानकारी दी। इसके बाद, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि इस मामले में पब्लिक इंटरेस्ट का पहलू भी शामिल है। कोर्ट ने पिटीशनर को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने अपना पक्ष रखने और ट्रायल के दौरान शिकायतकर्ता के तौर पर कोर्ट की मदद करने की आजादी दी। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को कानून के मुताबिक मामले को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।


