HomeUTTARAKHANDउपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ हिमालय का प्रवेश द्वार के रूप में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और भी गहरा कर देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सतत नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में स्थापित नए एम्स संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को मजबूत किया है, उन्होंने कहा कि सुशासन लोगों की जरूरतों को समझने और उनकी सेवा करने में निहित है।

एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा को अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त आबादी तक पहुंचना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने हेली एम्बुलेंस सेवाओं और चार धाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी नवोन्मेषी स्वास्थ्य सेवाओं की भी प्रशंसा की और इन्हें स्वास्थ्य सेवा वितरण में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में अवसंरचना के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और राष्ट्र निर्माण में चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को राष्ट्रसेवा की नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होगी।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की साधना, समर्पण और सेवा भाव का उत्सव है तथा यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब वर्षों की कठिन मेहनत एक नई जिम्मेदारी में परिवर्तित होती है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और राष्ट्र की अपेक्षाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जो स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

राज्यपाल ने युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीज केवल उपचार ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा लेकर चिकित्सक के पास आता है। ऐसे में चिकित्सकों का व्यवहार, सहानुभूति और समर्पण ही मरीज को सुरक्षा और विश्वास प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी चुनौतीपूर्ण है और उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपेक्षा है कि वे इन चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदान करें तथा समाज में विश्वास का संचार करें। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को सर्वाेपरि रखें तथा रोगी के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानें।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अवसर विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है और चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और प्रेरणादायी जीवन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने  कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक संस्थान के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही, हेली एम्बुलेंस सेवा राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की जनता को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाइयों की उपलब्धता तथा निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच जैसी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

समारोह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने उपाधि प्राप्त कर रहे डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है। उन्होंने मरीजों के विश्वास को बनाए रखने और हर परिस्थिति में उनके हित को सर्वाेपरि रखने का आह्वान किया, साथ ही नैतिकता और ईमानदारी को अपने कार्य का आधार बनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के बीच डॉक्टरों के लिए आजीवन सीखते रहना आवश्यक है, ताकि बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मरीजों के साथ प्रभावी संवाद को भी उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विश्वास और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद श्री नरेश बंसल, श्री महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन (अकादमिक) प्रो. सौरभ, संकाय सदस्यों, छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रतिभाग किया।
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Santosh Singh is an author and news content contributor at Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact Samachar Live team at samacharlive.in@gmail.com
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