वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है और इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सोमवार को बिठूर जाएंगे, जहां वे रामायण पाठ में शामिल होंगे और वाल्मीकि आश्रम में पूजा-अर्चना कर महर्षि वाल्मीकि को नमन करेंगे। माना जाता है कि इसी आश्रम में महाकाव्य रामायण की रचना हुई थी और माता सीता ने भी यहीं आश्रय लिया था। यह स्थान भगवान श्री राम के पुत्रों, लव और कुश की जन्मस्थली भी है। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री बिल्हौर और बिठूर विधानसभा क्षेत्रों के निवासियों के लिए 411 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। साथ ही, वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी करेंगे।
राज्य सरकार अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर ध्यान दे रही है, और साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पौराणिक महत्व वाले स्थलों का विकास भी कर रही है। इसी पहल के तहत, ‘रामायण सर्किट’ और ‘राम वन गमन पथ’ परियोजनाओं के माध्यम से अयोध्या, चित्रकूट और इटावा जैसी जगहों पर विकास कार्यों में तेजी लाई जा रही है। पर्यटन विभाग महर्षि वाल्मीकि से जुड़े धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने को प्राथमिकता दे रहा है। विभिन्न परियोजनाओं में करोड़ों रुपये का निवेश करके, योगी सरकार न केवल ‘आदिकवि’ महर्षि वाल्मीकि की विरासत को संरक्षित कर रही है, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन का भी विस्तार कर रही है। योगी सरकार 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती भी मनाएगी।
पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में रामायण से जुड़े कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं। राज्य सरकार ‘रामायण सर्किट’ और ‘राम वन गमन पथ’ जैसी पहलों के जरिए इन स्थलों के संरक्षण और विकास के साथ-साथ पर्यटन बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, महर्षि वाल्मीकि से जुड़े धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। चित्रकूट इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। वाल्मीकि समुदाय उनकी जयंती को ‘प्रकट दिवस’ के रूप में मनाता है।


