पड़ोसी राज्यों से धान लाने पर लगी रोक और हरियाणा-यूपी बॉर्डर पर जांच के बावजूद, यूपी से धान लगातार हरियाणा की अनाज मंडियों में पहुंच रहा है। इससे खरीद की निगरानी प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं। करनाल जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में यूपी से धान पहुंचने की खबरों के बाद, प्रशासन ने बॉर्डर चेकपॉइंट्स और अनाज मंडियों के प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ा दी है। इस बीच, इंद्री में एक आढ़ती (कमीशन एजेंट) के खिलाफ यूपी से धान लाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है।
यह कार्रवाई 22 अक्टूबर को हुई एक जांच के बाद की गई, जब इंद्री के SDM रमन गुप्ता ने अनाज मंडी में धान से भरी दो ट्रॉलियों को पकड़ा, जिनमें लगभग 160 क्विंटल धान था। आढ़ती, ‘मेसर्स तेजेंद्र सिंह सोहन लाल’ से धान के स्रोत के बारे में पूछा गया, लेकिन वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद उन्हें एक नोटिस जारी कर एक दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया।
तय समय के भीतर कोई जवाब न मिलने पर, मार्केट कमेटी के सचिव अमित कुमार ने शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर, खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आढ़ती और उनकी फर्म के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस बीच, अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) राहुल राय्या ने SDM और अनाज मंडियों के सभी नोडल अधिकारियों को बॉर्डर इलाकों और अनाज मंडियों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
घरौंडा के SDM अनुभव मेहता और करनाल के SDM देवेंद्र शर्मा ने अनाज मंडियों का दौरा किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिना उचित सत्यापन के किसी भी धान को अंदर न आने दिया जाए। जांच सख्त होने के कारण, अधिकारियों ने बॉर्डर चेकपॉइंट्स और अनाज मंडियों के प्रवेश द्वारों से धान से भरी कई ट्रॉलियों को वापस लौटा दिया है। ADC राय्या ने कहा, “हम अनाज मंडियों में धान के आने पर नजर रख रहे हैं। बिना सत्यापन के धान को आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हम पोर्टल के जरिए सत्यापन के बिना पड़ोसी जिलों या अन्य राज्यों से आने वाले धान को भी स्वीकार नहीं करेंगे।”
उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि धान की खरीद में किसी भी तरह की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार हरियाणा के किसानों द्वारा उत्पादित अनाज का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी अनाज मंडियों में निगरानी जारी रहेगी।” सूत्रों का आरोप है कि कुछ व्यापारी उत्तर प्रदेश (UP) के छोटे किसानों से 1,600 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर धान खरीदते हैं और फिर उसे हरियाणा में 2,461 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेच देते हैं। इस कीमत के अंतर से, परिवहन और अन्य खर्चों को घटाने से पहले ही, उन्हें 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल का मुनाफा मिल जाता है।
इस संदिग्ध तरीके में UP से धान लाकर उसे हरियाणा के स्थानीय किसानों के नाम पर बेचना शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि व्यापारियों पर आरोप है कि वे ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर गेट पास और किसानों के पंजीकरण का गलत इस्तेमाल करते हैं, ताकि UP के धान को हरियाणा का स्थानीय उत्पाद बताकर MSP पर बेचा जा सके। एक व्यापारी ने बताया, “हरियाणा के व्यापारी सुजानपुर, बरेली, रामपुर, बिजनौर, मुरादाबाद और अन्य इलाकों के छोटे किसानों से संपर्क करते हैं, जो फिर अपना धान उन्हें बेच देते हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण का इस्तेमाल करके UP के धान को MSP पर बेचने का काम किया जा रहा है।
भारतीय किसान यूनियन (सर छोटू राम) ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन खरीद प्रणाली का गलत इस्तेमाल करके UP और अन्य राज्यों से धान कम कीमत पर खरीदा जा रहा है और करनाल की मंडियों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। यूनियन के प्रवक्ता बहादुर मेहला बाल्डी ने इस मामले की विस्तृत जांच, राइस मिलों के भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) और इसमें शामिल व्यापारियों तथा अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मेहला ने कहा, “हम खरीद प्रक्रिया की विस्तृत जांच की मांग करते हैं, क्योंकि आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से UP के धान को MSP पर खरीदा गया है।”


