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हरियाणा के किसान की अनोखी पहल, प्राकृतिक खेती से बदल दी अपनी किस्मत, बने मिसाल


HARYANA NEWS: हरियाणा के बराड़ा-सडोरा रोड पर स्थित गांव शेरपुर सुलखनी में एक किसान प्राकृतिक खेती की मिसाल पेश कर रहे हैं। गांव के प्रगतिशील किसान अनिल दत्त ने पारंपरिक रासायनिक खेती से हटकर ऑर्गेनिक खेती को अपनाया है और आज वे अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। अनिल दत्त का कहना है कि ऑर्गेनिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि आर्थिक रूप से भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। अनिल दत्त इन दिनों अपने खेतों में ऑर्गेनिक गेहूं की फसल उगा रहे हैं।


अनिल दत्त ने बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से जमीन की उर्वरक क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही थी। इससे उत्पादन पर भी असर पड़ रहा था और लागत लगातार बढ़ती जा रही थी। ऐसे में उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाया। शुरुआत में कुछ चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन धैर्य और सही तकनीक के प्रयोग से अब उन्हें बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऑर्गेनिक खेती में गोबर की खाद, जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और फसल मजबूत बनती है।


उन्होंने कहा कि हम गाना की बचाई भी करते हैं तो उसमें भी एक-दो कट्टे छूने केडल देते हैं क्योंकि सुनाने में कैल्शियम होता है हम रसायन का प्रयोग  नहीं करते उनका कहना है की गेहूं की बिजाई के लिए अक्टूबर के अंत या फिर नवंबर महीने के शुरू का समय काफी बेहतर रहता है उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल 6महीने में पूरी तरह पक्का तैयार हो जाती है बैसाखी के आसपास इसकी कटाई प्रारंभ हो जाती है। ऑर्गेनिक गेहूं की पैदावार पहले से अधिक है और बाजार में इसकी अच्छी मांग भी मिल रही है। लोग अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं और रसायन मुक्त अनाज खरीदना पसंद कर रहे हैं,


उन्होंने कहा कि किस को इसका उचित मूल्य मिलना चाहिए लेकिन हमें दूसरी गेहूं के समान ही इसका मूल्य मिल रहा है जबकि सरकार को इस और कोई नीति निर्धारण करनी चाहिए । सरकार को हर गांव में एक वीडियो केंद्र स्थापित करना चाहिए जिससे किसान को खेती के लिए जितनी जरूरत हो वह उतना सामान वहां से खरीद सके उन्होंने यह भी कहा कि खेती में बेहतरीनकर्य करने वाले किसानों को सरकार सम्मानित भ करें। जिससे किसानों का हौसला और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि 1एकड़ से 30क्विंटल गेहूं की पैदावार ले रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके फार्म पर करनाल संस्थान के निर्देश भी गेहूं की पैदावार देखने के लिए आए थे। उन्होंने बताया वह भी उनके द्वारा की गई खेती से काफी प्रभावित हुए और कहा कि यहां पर वैज्ञानिक तरीके से खेती हो रही है ।


अनिल दत्त ने कहा कि ऑर्गेनिक खेती पूरी तरह फायदे का काम है। इसमें शुरुआती मेहनत और समझ की जरूरत होती है, लेकिन एक बार प्रणाली समझ में आ जाए तो लागत कम और लाभ अधिक होता है। उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च अब लगभग खत्म हो चुका है, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है। साथ ही जमीन की उर्वरता भी लगातार बढ़ रही है।


उन्होंने अन्य किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे भी प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। फसल का रख-रखाव उचित तरीके से करें, समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और जैविक उपचार अपनाएं। उनका मानना है कि यदि किसान सही मार्गदर्शन और धैर्य के साथ ऑर्गेनिक खेती करें तो उन्हें निश्चित रूप से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।अनिल दत्त का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी आय बढ़ाना नहीं, बल्कि गांव और क्षेत्र के किसानों को जागरूक करना भी है ताकि वे रसायन मुक्त खेती कर अपनी जमीन और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित कर सकें।


 

Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in
Santosh Singh is an author and news content contributor at Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact Samachar Live team at samacharlive.in@gmail.com
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