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क्या पिछले चुनावों से सीख लेते कटेहरी उपचुनाव में उम्मीदवार का चयन करेगी भाजपा



क्या पिछले चुनावों से सीख लेते कटेहरी उपचुनाव में उम्मीदवार का चयन करेगी भाजपा


















  • आखिर कौन होगा प्रत्याशी? बड़े नेताओं के आगे-पीछे चलने या धरातल पर पार्टी को मजबूत करने वाला

  • तीन दशक के चुनावों में प्रत्याशी का सही चयन न होने से कटेहरी में भाजपा को करना पड़ा है हार का सामना

    अम्बेडकरनगर। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भारत की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने के लिए रात-दिन मेहनत करते हुए भारतीय जनता पार्टी को नित नयी उचाईयों पर पहुंचाने के लिए मेहनत कर रहे हैं जिसका परिणाम रहा कि जम्मू कश्मीर की जनता ने सरकार की नीतियों पर मोहर लगाते हुए प्रदेश में सबसे ज्यादा मत प्रतिशत भाजपा के नाम कर दिया। वहीं पार्टी की जनहितकारी नीतियों के कारण तमाम उठा-पठक के बावजूद भी भाजपा हरियाणा में अपने बूते तीसरी बार सरकार बनाने का रिकार्ड अपने नाम दर्ज करने जा रही है लेकिन भाजपा प्रदेश के जिले में दिन-प्रतिदिन पिछड़ती जा रही है जब कि विगत 5 महीने से सूबे के संवेदनशील मुख्यमंत्री लगातार जनपद में दौरा करके जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने का सार्थक प्रयास करते दिखाई पड़ रहे हैं लेकिन इन सबके बावजूद प्रत्याशी चयन में विगत कई बार से चूक हो जाने के कारण हार का सामना देखते-देखते पार्टी समर्थक व कार्यकर्ता और मतदाताओं में निराशा का भाव पनपने लगा है क्योंकि सारे समस्याओं के बावजूद समाजवादी पार्टी मजबूत होती जा रही है जब कि सच्चाई तो यह है कि समाजवादी पार्टी पीडीए का नारा देते हुए समाजवाद का दम तो भरती है लेकिन जब टिकट बंटवारे की बात आती है तो मिल्कीपुर से अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद जब कि कटेहरी विधानसभा से जनपद के सांसद लालजी वर्मा की पत्नी पर मुहर लगाया जाता है। वहीं अंत्योदय के सिद्धान्त के उपासक भाजपा जनकल्याणकारी नीतियों को अमल में रहने के बावजूद भी जिले में हार जाती है। नाम न छापने की शर्त पर दर्जनों पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि सारे कार्य कागजों में होते दिखाई पड़ रहे हैं धरातल पर पांच महीने में पार्टी संगठन हित में कोई कार्य नहीं कर पायी है। सच्चाई तो यहां तक है कि कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने के बावजूद भी पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के जयन्ती के अवसर पर 25 सितम्बर को शायद ही एक तिहाई बूथों पर औपचारिकता में ही रह गयी। जनता तो यहां तक कहती है कुछ बदनाम किस्म के लोग ही इन दिनों बड़े नेताओं के आगे-पीछे फोटो खि्ांचाते नजर आते है जिनकी सच्चाई तो यह है पिछली बार जब सदस्यता अभियान हो रही थी उन दिनों जिले के सदस्यता प्रमुख का दायित्व निभाने वाले महानुभाव कभी 75 कभी 80 हजार की सदस्यता बताते नहीं थकते थे लेकिन जब हकीकत आयी तो पूरे जनपद में साढ़े तीन हजार भी सदस्य नहीं बन पाये थे। अगर ऐसे ही महानुभाव पार्टी में जिम्मेदार की भूमिका अदा करते रहें तो चुनाव में पार्टी का क्या हश्र होगा यह अभी से कहना जल्दवाजी ही माना जायेगा। मजेदार बात यह है कि उपचुनाव के कारण विधानसभा कटेहरी में शिक्षक सम्मेलन होना था जो अब तक नहीं हो पाया यह भी अपने आप में एक छोटी सी बानगी ही माना जायेगा जब कि प्रकोष्ठों और परिकल्पों का दायित्व जिले के स्वयं को मास्टर माइण्ड बताने वाले अध्यक्ष सबसे कर्मठ उपाध्यक्ष रजनीश सिंह को जिम्मेदारी सौंप रखी है जो किसी भी बड़े नेता के आने पर उसके आगे-पीछे ही फोटो खिंवचाते नजर आते हैं, अब पार्टी को यह तय करना होगा कि फोटो खिंचवाने वाला नेता चाहिए अथवा गांव-गांव बूथ-बूथ जाकर पार्टी मजबूत करने वाला सिपाही।

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Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in
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