सोमवार को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक विशेष MP/MLA कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ 2018 के मानहानि मामले को खारिज कर दिया। यह मामला 2018 में कर्नाटक के बेंगलुरु में राहुल गांधी द्वारा की गई एक टिप्पणी से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि लोकसभा में विपक्ष के नेता ने अमित शाह के बारे में आपत्तिजनक बातें कही थीं। फैसला सुनने के लिए राहुल गांधी आज दिल्ली से सुल्तानपुर की विशेष MP/MLA कोर्ट पहुंचे।
MP/MLA कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 2018 के एक मामले में तलब किया था। यह मामला बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित मानहानिपूर्ण टिप्पणी से जुड़ा था। यह शिकायत विजय मिश्रा ने दर्ज कराई थी, जो उस समय BJP के जिला उपाध्यक्ष थे। आज ANI से बात करते हुए, शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद जताई।
मिश्रा ने कहा, “हमें न्याय मिलने की उम्मीद है, खासकर जिस तरह से उन्होंने हमारे तत्कालीन BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष (अमित शाह) के साथ व्यवहार किया। यह कानूनी मामला 2018 से चल रहा था और 2026 तक चलने वाला था। आज फैसले की तारीख है, और जिस तरह से हमारे वकीलों ने इस मामले को लड़ा है, हमें उम्मीद है कि फैसला हमारे पक्ष में आएगा।”
वकील काशी प्रसाद शुक्ला के अनुसार, “यह मामला मई 2018 का है, जब बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने उन्हें एक हत्या के मामले में आरोपी बताया था। इससे नाराज होकर, विजय मिश्रा – जो उस समय स्थानीय जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष और BJP के जिला उपाध्यक्ष भी थे – ने एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।”
इससे पहले, इस मामले पर बात करते हुए वकील पांडे ने कहा था कि अगर गांधी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें IPC की धारा 500 के तहत दो साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। CrPC की धारा 437A के तहत, जमानत मिलने पर आरोपी को एक जमानत बांड (bail bond) देना होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई अपील दायर की जाती है, तो आरोपी अपीलीय अदालत के समक्ष उपस्थित हो।


