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UGC के नए नियमों पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम दिन, CJI सूर्यकांत की बेंच करेगी सुनवाई


SC On UGC Guidelines 2026:सुप्रीम कोर्ट में आज यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ के खिलाफ दाखिल की गई जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई होनी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी, जिसमें नियमों को असंवैधानिक बताते हुए जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ भेदभावपूर्ण होने का आरोप लगाया गया है। इस सुनवाई से उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव रोकने की नीतियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।


PIL में क्या आरोप लगाए गए हैं?


बता दें, वकील विनीत जिंदल ने याचिका दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि UGC के नियम असंवैधानिक हैं क्योंकि ये जनरल कैटेगरी के छात्रों को शिकायत निवारण तंत्र से वंचित रखते हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भेदभाव की परिभाषा गैर-समावेशी है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करती है। उनका कहना है कि ये नियम जनरल कैटेगरी को हमेशा अपराधी मानते हैं, जबकि OBC, SC, ST को ही पीड़ित के रूप में देखते हैं। इससे फर्जी शिकायतों का खतरा बढ़ सकता है, बिना झूठी शिकायतों पर दंड के प्रावधान के। याचिका में नियमों के मौजूदा रूप में लागू करने पर रोक लगाने की मांग की गई है।


UGC के नए नियमों का उद्देश्य


बता दें, UGC ने ये नए नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए थे, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान या विकलांगता के आधार पर भेदभाव को खत्म करने का लक्ष्य रखते हैं। खासतौर पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और विकलांग व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया है। ये नियम 2012 के पुराने नियमों को सुपरसीड करते हैं और ज्यादा मजबूत तंत्र बनाने का दावा करते हैं।


ये नियम 2019 में दाखिल एक PIL से निकले हैं, जिसमें रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं राधिका वेमुला और आबेदा सलीम तडवी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव के कारण हुई आत्महत्याओं का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 की शुरुआत में UGC को मजबूत तंत्र बनाने का निर्देश दिया था, जिसमें स्टेकहोल्डर्स की सलाह शामिल की गई। परिणामस्वरूप, UGC ने नए नियम तैयार किए, जो सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) पर लागू होते हैं और छात्रों, फैकल्टी, स्टाफ से लेकर प्रबंधन तक को कवर करते हैं।


ये नियम बने विरोध-प्रदर्शन की वजह


1. जातिगत भेदभाव की विस्तारित और अस्पष्ट परिभाषा:UGC के नए नियम में भेदभाव की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है, जिसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, जानबूझकर या अनजाने में होने वाले व्यवहार शामिल हैं। इसमें SC, ST और OBC को पीड़ित के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन सामान्य वर्ग को बाहर रखा गया है। आलोचकों का कहना है कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों को उत्पीड़क मान लिया गया है और कोई भी सामान्य बातचीत या फैसला भेदभाव का आरोप बन सकता है।


2. इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) का गठन:UGC के नए नियम के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज को एक इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर स्थापित करना होगा, जो भेदभाव की शिकायतों को संभालेगा, निगरानी करेगा और नीतियां लागू करेगा। इसमें SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांगों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। लेकिन विरोध करने वाले कहते हैं कि इससे कैंपस का माहौल बिगड़ेगा और NGOs या बाहरी तत्वों का हस्तक्षेप बढ़ेगा।


3.इक्विटी कमिटी का गठन और रिपोर्टिंग:संस्थानों को इक्विटी कमिटी बनानी होगी, जिसमें OBC, SC, ST, महिलाओं और दिव्यांगों के सदस्य होंगे। यह कमिटी शिकायतों की जांच करेगी और UGC को हर छह महीने में रिपोर्ट देगी। समय सीमा सख्त है – शिकायत पर 24 घंटे में मीटिंग, 15 दिनों में रिपोर्ट और 7 दिनों में कार्रवाई करना आवश्यक है। लेकिन आलोचक कहते है कि इससे प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा और सामान्य वर्ग के सदस्यों की अनुपस्थिति से एकतरफा फैसले होंगे।


4. फर्जी शिकायतों पर कोई दंड नहीं और सख्त अनुपालन:नियमों में फर्जी शिकायतों पर कोई सजा का प्रावधान नहीं है, जबकि संस्थानों पर गैर-अनुपालन के लिए कड़े दंड हैं। इससे झूठे आरोपों का डर बढ़ गया है। दूसरी तरफ, आलोचकों का कहना है कि दोषी जब तक निर्दोष साबित न हो का सिद्धांत लागू करता है।   

Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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