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विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्व संध्या पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का संदेश-“स्वच्छता बाहर, स्वच्छता भीतर”

ऋषिकेश, 4 जून। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संख्या पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल धरती, जल, वायु और वृक्षों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने विचारों, संस्कारों और जीवन मूल्यों को शुद्ध एवं स्वच्छ बनाना भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि बाहरी पर्यावरण को बचाना है तो सबसे पहले भीतरी पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त बनाना होगा।
भीतरी स्वच्छता से तात्पर्य है अपने मूल स्वरूप की ओर लौटना।” हमारा वास्तविक स्वरूप शांति, प्रेम, करुणा और आनंद है, लेकिन क्रोध, अहंकार, लोभ, भय और नकारात्मक विचारों की परतें उसे ढक देती हैं। जिस प्रकार हम अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखते हैं, उसी प्रकार अपने मन, विचारों और भावनाओं को भी शुद्ध करना आवश्यक है। स्वाध्याय, ध्यान, सत्संग, सेवा और संस्कारों से जुड़कर हम अपने भीतर की पवित्रता को पुनः जागृत कर सकते हैं। जब अंतर्मन निर्मल होता है, तब जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और दिव्यता का प्रकाश स्वतः प्रस्फुटित होने लगता है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज विश्व प्लास्टिक, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं की जड़ केवल बाहरी नहीं, बल्कि मानवीय चेतना में उत्पन्न लालच, उपभोगवाद, असंवेदनशीलता और प्रकृति से दूरी भी है। जब हम अपने मूल्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक जड़ों से दूर हो जाते हंै, तब प्रकृति के साथ हमारा संबंध भी कमजोर होने लगता है।
पूज्य कहा कि नदियाँ हमारे लिये केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवनधारा हैं। वृक्ष प्राणवायु के स्रोत हैं। पृथ्वी केवल भूमि नहीं, बल्कि हमारी जननी है। जब हम इन भावनाओं को अपने जीवन में उतारते हैं, तभी सच्चे अर्थों में पर्यावरण संरक्षण का संकल्प साकार होता है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा, “वेद मंत्रों, संस्कारों, संस्कृति, मूल्यों और अपनी जड़ों से जुड़कर हम अपने भीतरी पर्यावरण को स्वच्छ रख सकते हैं। स्वच्छ विचार ही स्वच्छ समाज और स्वच्छ पर्यावरण का आधार हैं।”
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली बनना होगा। प्रत्येक व्यक्ति को यह संकल्प लेना होगा कि “मेरा कचरा मेरी जिम्मेदारी”। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक अपने द्वारा उत्पन्न कचरे का उचित प्रबंधन करे, प्लास्टिक का उपयोग कम करे और पुनर्चक्रण को अपनाए, तो पर्यावरणीय चुनौतियों का बड़ा समाधान स्वतः संभव हो जाएगा।
पूज्य स्वामी जी ने विशेष रूप से यूज एंड थ्रो की संस्कृति के उपर उठकर यूज एंड ग्रो की संस्कृति को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का उपभोक्तावादी समाज वस्तुओं को उपयोग कर फेंकने की मानसिकता को बढ़ावा दे रहा है, जबकि भारतीय संस्कृति संरक्षण, पुनः उपयोग और संवर्धन की संस्कृति है। यदि हम किसी वस्तु का पुनः उपयोग करें, उसे नया जीवन दें, संसाधनों का सम्मान करें और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करें, तो यह धरती आने वाली पीढ़ियों के लिये अधिक सुरक्षित और सुंदर बन सकती है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि वे अपने जीवन में स्वच्छता, संवेदनशीलता और सतत विकास के सिद्धांतों को अपनाएँ और इस धरती को हराभरा रखने में योगदान दें।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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