मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक के दौरान समिति ने विभिन्न विभागों के प्रस्तावों की अनुशंसा की.
मुख्य सचिव ने पंपिंग पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव को टिकाऊ एवं किफायती बनाये रखने के लिए इसे सौर ऊर्जा से चलाने की संभावना तलाशने और इसे प्रस्ताव में शामिल करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि सभी पम्पिंग पेयजल परियोजनाओं के निर्माण में सोलराइजेशन की सम्भावनाएं अनिवार्य रूप से तलाशी जानी चाहिए। उन्होंने नियोजन विभाग को इस संबंध में शासनादेश जारी करने का भी निर्देश दिया.
मुख्य सचिव ने उस शुल्क पर नाराजगी व्यक्त की जो विभाग अभी भी परियोजना लागत के प्रतिशत के रूप में सलाहकारों को भुगतान करते हैं। उन्होंने कहा कि सलाहकारों को एकमुश्त फीस भुगतान के संबंध में पूर्व में दिये गये निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने इस संबंध में शासनादेश वापस विभागों को भेजने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने किसी परियोजना या परियोजना के किसी हिस्से में लागत में अप्रत्याशित वृद्धि के मामलों को गंभीरता से लेने की बात कही. उन्होंने कहा कि गलत गणना कर लागत बढ़ाने वाली एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाये. उन्होंने योजना विभाग को सार्वजनिक निर्माण विभाग के मार्गदर्शन में लागत भिन्नता के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के निर्देश दिये। इससे परियोजनाओं की लागत में अनावश्यक वृद्धि को रोका जा सकेगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि आयुष की दृष्टि से राज्य में काफी संभावनाएं हैं, इस दिशा में अच्छे प्रोजेक्ट तैयार किये जाएं, प्रोजेक्ट की लोकेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि गरुड़ (बागेश्वर) में आईटीआई के प्रस्ताव पर निकट ही छात्रावास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। कहा कि इससे आईटीआई में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को काफी सुविधा होगी।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. सुधांशु, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पांडे, श्री श्रीधर बाबू अद्दांकी एवं श्री सी. रविशंकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित विभागों के शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे।




