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गुरमति साहित्य में उत्तर प्रदेश के संत कवियों का योगदान

उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी तथा बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय भाषा उत्सव, 2023 को समर्पित दिनाँक 15 दिसम्बर, 2023 को बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के सामाजिक अध्ययन विद्यापीठ सभागार (SAS) में ‘‘गुरमति साहित्य में उत्तर प्रदेश के संत कवियों का योगदान‘‘ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन प्रातः 11ः00 बजे से सफलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम दीप प्रज्जवलन एवं सरस्वती जी की प्रतिमा पर फूल एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।

उक्त संगोष्ठी में सूर्य प्रसाद दीक्षित, वरिष्ठ विद्वान, साहित्यकार, डाॅ सत्येन्द्र पाल सिंह, वरिष्ठ पंजाबी विद्वान, लेखक, स० दविन्दर पाल सिंह, वरिष्ठ पंजाबी विद्वान, लेखक, मेजर (डाॅ०) मनमीत कौर सोढ़ी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, दर्शनशास्त्र, नवयुग कन्या महाविद्यालय, लखनऊ, प्रो० रामपाल गंगवार, अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय आदि पंजाबी विद्वानों, विदुषियों के द्वारा उपरोक्त विषय पर अपने-अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये गये।

सूर्य प्रसाद दीक्षित- संत बुल्ला साहब, संत यारी साहब के गुरुमुख चेले और संत जगजीवन साहब व संत गुलाल साहब के गुरू थे। यह जाति के कुनबी थे और असल नाम इनका बुलाकीराम था। इन्होंने भुरकुंडा गांव जिला गाजीपुर में अपना सतसंग चालू किया जहां इनके बाद संत गुलाल साहब और संत भीखा दास जी भी सतसंग कराते रहे और अब तक वहां तीनों की समाधि भी मौजूद हैं। इनके जीवन का समय विक्रमी सम्वत 1750 से 1825 के मध्य है।

प्रो0 रामपाल गंगवार- जहाँ पर भाषा जीवित रहती है, वहाँ उसकी संस्कृति भी अस्तित्व में रहती है। संत कवियों में फरीद को पंजाबी का आदि कवि कहा जाता है। फरीद की बाणी ‘‘आदि ग्रंथ‘‘ में संगृहीत हैं। गुरु नानक को ही पंजाबी का आदि कवि मानना होगा।

गुरु नानक की रचनाओं में सर्वप्रसिद्ध ‘‘जपुजी‘‘ हैय इसके अतिरिक्त ‘‘आसा दी वार, ‘‘सोहिला‘‘ और ‘‘रहिरास‘‘ तथा लगभग 500 फुटकर पद और हैं। भाव और अभिव्यक्ति एवं कला और संगीत की दृष्टि से यह बाणी अत्यंत सुंदर और प्रभावपूर्ण है। भक्ति में ‘‘सिमरन‘‘ और जीवन में सेवा नानक की वाणी के दो प्रमुख स्वर हैं।

डाॅ0 सत्येन्द्र पाल सिंह- गुरमति साहित्य में कबीरदास जी 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। उनकी रचनाएँ सिक्खों के आदि ग्रंथ में सम्मिलित की गयी हैं। संत कवियों में जगजीवन दास, बावरी साहिबा, बाबा कानी राम, पल्टूदास, दयाबाई एवं सहजोबाई का नाम प्रमुखतः से प्रसिद्ध है। गुलाल साहब प्रख्यात सन्त थे। इनका जन्म सत्रहवीं शती के अंतिम चरण में बसहरी (जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश) के एक क्षत्रिय जमींदार कुल में हुआ था।

इनके गुरु बुल्ला साहब, ‘बुलाकीराम कुर्मी‘ के नाम से इनके परिवार का हल जोतने का काम करते थे। उनके आध्यात्मिक जीवन से प्रभावित होकर गुलाल साहब ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया था और उनके निधन के पश्चात उनकी गद्दी के अधिकारी हुए थे। ये ऊँचे दरजे के साधक थे। आपने निर्विकल्प मन की समावस्था की दिव्य अनुभूति का वर्णन अनेक रूपों में निरन्तर अपनी रचनाओं में किया है। ‘ज्ञानगुष्टि‘ और ‘रामसहस्रनाम‘ इनकी वाणियों के संग्रह है। इनकी वाणी ‘गुलाल साहब की बानी‘ नाम से भी प्रकाशित हुई है।

स० दविन्दर पाल सिंह- गुरु रविदासजी मध्यकाल में एक भारतीय संत कवि सतगुरु थे। इन्हें संत शिरोमणि सत गुरु की उपाधि दी गई है। इन्होंने रविदासीया, पंथ की स्थापना की और इनके रचे गए कुछ भजन सिख लोगों के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं। इन्होंने जात पात का घोर खंडन किया और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया।

गुरमति साहित्य के प्रसिद्ध संत कवियों में पलटू साहब की अनेक रचनाएँ प्रसिद्ध हैं। साखियों, कुंडलियों, रेखतों, झूलनों, अरिल्लों तथा शब्दों की गणना विशेष रूप से की जाती है तथा इनके कतिपय संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं।

इनकी पंक्तियों में बहुत स्पष्ट एवं सरल किंतु ओजपूर्ण और मुहावरेदार भाषा का प्रयोग हुआ है तथा अपने हृदय की सच्चाई और अपने भावों की निर्भीक अभिव्यक्ति के आधार पर, ये कभी-कभी द्वितीय ‘कबीर‘ तक भी कहे जाते हैं। इन दोनों में विचारसाम्य के साथ-साथ एक ही जैसे शब्दों एवं वाक्यों का व्यवहार परिलक्षित होता है।

मेजर (डाॅ0) मनमीत कौर सोढ़ी- गुरमत साहित्य में उत्तर प्रदेश में काशी में जन्मे संत कबीर एवं भक्त रविदास, प्रयागराज के भगत रामानंद, काकोरी के भक्त भीखण जी का योगदान रहा है और इन सब भक्तों की वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज है, जिन्होंने प्रभु भक्ति के साथ-साथ एक नूर ते सब जग उपजिया कौन भले को मंदे कहकर ऊंच-नीच, जात-पात के भेद को मिटाया तथा सूरा सो पहचानिए जो लरै दीन के हेत कहकर सच्चाई के लिए जूझने की प्रेरणा देकर समाज कल्याण में भी बहुमूल्य योगदान दिया I

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सूर्य प्रसाद दीक्षित जी ने की एवं संगोष्ठी का सफल संचालन कार्यक्रम संयोजक डाॅ0 बलजीत कुमार श्रीवास्तव जी ने किया। कार्यक्रम के अन्तर्गत अधिकाधिक संख्या में विश्वविद्यालय के शोधार्थी छात्र, पंजाबी संगत एवं श्रोतागण उपस्थित थे। श्रोतागणों ने कार्यक्रम की सराहना कर कार्यक्रम की पुनरावृत्ति किये जाने का भी अनुरोध किया।

अन्त में अकादमी के निदेशक के प्रतिनिधि के रूप में एवं कार्यक्रम काॅर्डिनेटर अरविन्द नारायण मिश्र ने संगोष्ठी में उपस्थित सम्माननीय वक्ताओं/विद्वानों को अंगवस्त्र/स्मृतिचिन्ह भेंट कर सम्मानित करते हुये सभी का साधुवाद आभार व्यक्त किया।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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