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हरियाणा सरकार ने शीतलहर व पाले से बचाव के लिए तैयार की ‘शीत लहर कार्य योजना’, आमजन, किसानों व पशुपालकों से सतर्कता बरतने की अपील


Haryana News: उत्तर भारत में लगातार बढ़ रही सर्दी और संभावित शीतलहर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने आमजन को शीतलहर एवं पाले के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप “शीत लहर कार्य योजना” तैयार की है। इस कार्य योजना का उद्देश्य राज्य में शीतलहर और पाले के प्रभाव को कम करने के लिए एक समन्वित एवं व्यापक प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है।


राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त एवं मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, विकास एवं पंचायत, शिक्षा, शहरी स्थानीय निकाय सहित सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शीतलहर से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठा लिए जाएं।


डॉ. मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष जनवरी 2025 में चंडीगढ़, अंबाला, करनाल और हिसार में शीतलहर का प्रभाव देखा गया था और इसी प्रकार की स्थिति वर्ष 2026 के प्रथम सप्ताह में भी देखने को मिल रही है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जब मैदानी क्षेत्रों में वास्तविक न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या इससे कम तथा पहाड़ी क्षेत्रों में शून्य डिग्री के आसपास रहता है, तो उसे शीतलहर की श्रेणी में रखा जाता है। हरियाणा में अंबाला, करनाल और हिसार में भारतीय मौसम विभाग के केंद्र संचालित हैं, इसके अतिरिक्त राज्य में चार पार्ट-टाइम, 33 स्वचालित मौसम स्टेशन, 6 कृषि स्वचालित मौसम स्टेशन तथा 33 स्वचालित वर्षा मापन केंद्र कार्यरत हैं।


उन्होंने आमजन से अपील की कि वे मौसम की जानकारी के लिए प्रतिदिन रेडियो, टीवी, समाचार पत्रों एवं स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें, ताकि शीतलहर की पूर्व सूचना मिल सके। आवश्यकतानुसार गर्म कपड़े, दवाइयां और अन्य जरूरी सामग्री पहले से सुरक्षित रखें।


डॉ. मिश्रा ने बताया कि लंबे समय तक सर्दी के संपर्क में रहने से सर्दी-जुकाम, फ्लू, नाक बहना या बंद होना, नाक से खून आना जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें, घर के अंदर रहें और अनावश्यक यात्रा से परहेज करें। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन-सी युक्त पौष्टिक आहार, फल-सब्जियों का सेवन करें तथा नियमित रूप से गर्म तरल पदार्थ लें। बुजुर्गों, बच्चों और अकेले रहने वाले पड़ोसियों का विशेष ध्यान रखें।


उन्होंने शीतलहर के दौरान सावधानी बरतने के साथ-साथ “क्या न करें” पर भी जोर दिया। घर के अंदर कोयला या अंगीठी जलाने से बचें, क्योंकि बंद स्थानों में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पन्न होकर जानलेवा साबित हो सकती है। ठंडी हवाओं के संपर्क में आने से फ्रॉस्टबाइट के लक्षण जैसे सुन्नता, उंगलियों, पैर की उंगलियों, कान और नाक के सिरे पर सफेद या पीला रंग दिखने पर सतर्क रहें। हाइपोथर्मिया की स्थिति में शरीर का तापमान अत्यधिक गिर जाता है, जिससे कंपकंपी, बोलने में कठिनाई, अत्यधिक नींद, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी हो सकती है, जो एक आपातकालीन स्थिति है और तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक है।


डॉ. मिश्रा ने बताया कि सिर, गर्दन, हाथ और पैरों को अच्छी तरह ढककर रखें क्योंकि शरीर की अधिकांश ऊष्मा इन्हीं अंगों से नष्ट होती है। त्वचा को नियमित रूप से तेल, पेट्रोलियम जेली या बॉडी क्रीम से मॉइस्चराइज़ करें। पालतू जानवरों, मवेशियों एवं घरेलू पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उन्हें घर के अंदर रखें।हाइपोथर्मिया की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को गर्म स्थान पर ले जाएं, गीले कपड़े बदलकर सूखे कपड़े पहनाएं, कंबल या चादर ओढ़ाएं और गर्म पेय पदार्थ दें। शराब का सेवन न कराएं। स्थिति गंभीर होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।


उन्होंने बताया कि शीतलहर और पाला कृषि फसलों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इसके मद्देनजर कृषि विभाग को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शीतलहर के कारण गेहूं व जौ में काला रतुआ, सरसों व सब्जियों में सफेद रतुआ तथा आलू-टमाटर में लेट ब्लाइट जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। इससे फसलों के अंकुरण, वृद्धि, पुष्पन, उपज और भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।


किसानों को सलाह दी गई है कि वे बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सी-क्लोराइड का छिड़काव करें तथा फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें। शीतलहर के दौरान हल्की एवं बार-बार सतही सिंचाई करें और जहां संभव हो स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाएं। ठंड एवं पाला-प्रतिरोधी फसलों और किस्मों की खेती करें। नर्सरी और छोटे पौधों को प्लास्टिक, पुआल या सरकंडा घास से ढककर सुरक्षित रखें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शीतलहर के दौरान मिट्टी में पोषक तत्व न डालें, क्योंकि ठंड के कारण जड़ों की गतिविधि कम हो जाती है और पौधे उन्हें अवशोषित नहीं कर पाते।


डॉ. मिश्रा ने बताया कि शीतलहर के समय पशुओं को जीवित रहने के लिए अधिक ऊर्जा और भोजन की आवश्यकता होती है। ठंडी हवाओं से बचाव के लिए पशुओं के आवास को चारों ओर से ढकें, उन्हें घर के अंदर रखें, उच्च गुणवत्ता वाला चारा, वसा युक्त पूरक आहार और संतुलित राशन दें। शीतलहर के दौरान पशुओं को खुले में बांधकर न छोड़ें, पशु मेलों के आयोजन से बचें और ठंडा चारा व पानी न दें।


उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में बेघरों के लिए रैनबसेरों की व्यवस्था की गई है, जहां कंबल और बिस्तर उपलब्ध हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन सुविधाओं का लाभ लिया जा सकता है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में डायल 112 पर संपर्क किया जा सकता है।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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