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‘बदरिया’ दिल्ली की विविधता और भारतीय संस्कृति की गहराई का उत्सव है: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता


नई दिल्ली:राजधानी दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति में एनडीएमसी के कन्वेंशन सेंटर में पहली बार आयोजित ‘बदरिया: ए मॉनसून फेयरवेल फेस्टिवल’ ने राजधानीवासियों को मानसून के साथ एक अद्वितीय सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया। कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, माता चकेरी देवी फाउंडेशन और मैथिली-भोजपुरी अकादमी द्वारा आयोजित इस भव्य उत्सव ने संगीत, नृत्य, लोककला और साहित्य का ऐसा संगम रचा, जिसने हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री कपिल मिश्रा, सांसद बांसुरी स्वराज, श्री योगेन्द्र चंदोलिया, विधायकगण और एनडीएमसी वाईस चेयरमैन कुलजीत चहल सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। दीप प्रज्वलन के उपरांत मंत्री कपिल मिश्रा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को स्मृति-चिह्न भेंट किया एवं माता चकेरी फाउंडेशन की ओर से कपिल मिश्रा को भी स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया, जिससे कार्यक्रम का शुभारंभ और अधिक गरिमामय बन गया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘बदरिया’ केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि दिल्ली की विविधता और भारतीय संस्कृति की गहराई का उत्सव है। यह आयोजन हमारी परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने वाला सेतु है। जिस तरह से कलाकारों ने संगीत, नृत्य और चित्रकला के माध्यम से मानसून की सुंदरता और भावनाओं को प्रस्तुत किया, वह अविस्मरणीय है। इस प्रकार के उत्सव दिल्ली को न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध करते हैं, बल्कि समाज में भाईचारे और एकजुटता का संदेश भी देते हैं।


मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगे कहा कि राजधानी को सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाना हमारा उद्देश्य है। ‘बदरिया’ जैसे आयोजन इस विज़न को आगे बढ़ाते हैं और दिल्लीवासियों को प्रकृति, कला और परंपरा से जोड़ते हैं। मैं कपिल मिश्रा, कला एवं संस्कृति विभाग और माता चकेरी फाउंडेशन को इस उत्कृष्ट आयोजन के लिए बधाई देती हूँ और विश्वास दिलाती हूं कि सरकार ऐसे सांस्कृतिक प्रयासों को और प्रोत्साहन देगी।”


उन्होंने अपने संबोधन में दिल्ली के विकास की ओर इशारा करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने पिछले छह महीनों में राजधानी को बेहतर बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। जहां कभी जलभराव से लोग परेशान रहते थे, वहीं आज आईटीओ और मिंटो ब्रिज जैसे संवेदनशील क्षेत्र पानी से पूरी तरह मुक्त हैं। बारिश के दौरान जहां पहले घंटों तक पानी भरा रहता था, अब कुछ ही मिनटों में निकल जाता है। यह इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली अब नई स्थिति में पहुंच चुकी है, एक ऐसी राजधानी जो सांस्कृतिक रूप से भी सशक्त है और आधारभूत सुविधाओं में भी बेहतर है।


कला, संस्कृति व भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने इस अवसर पर कहा कि दिल्ली में पहली बार भोजपुरी, मैथिली और लोक परंपराओं को लेकर इतना बड़ा सांस्कृतिक आयोजन हुआ है। यह सब मुख्यमंत्री जी के विज़न और मार्गदर्शन के कारण संभव हो पाया। इस बार का अनुभव इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली सांस्कृतिक आयोजनों की नई धुरी बन सकती है। आने वाले समय में छठ, दुर्गापूजा और अन्य पारंपरिक पर्वों को भी इसी भव्यता के साथ मनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएँगे।


उत्सव की विशेष बात यह रही कि मौसम में अचानक बदलाव और स्थल परिवर्तन के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। केवल कुछ घंटों की तैयारी में ही नए स्थल पर कार्यक्रम को सफलता से आयोजित करना इस आयोजन की सुदृढ़ योजना और दिल्लीवासियों के सांस्कृतिक प्रेम का परिचायक रहा।संगीत, संस्कृति और सद्भाव से सजी इस शाम ने दिल्लीवासियों को मानसून की फुहार के बीच अविस्मरणीय अनुभव दिया और यह संदेश दिया कि संस्कृति ही समाज को जोड़ने का सबसे सुंदर माध्यम है।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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