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दिल्ली में बिक रहा जानलेवा चाइनीज मांझा, कोर्ड वर्ड में की जा रही सप्लाई और बुकिंग


Chinese Manjha: स्वतंत्रता दिवस के पास आते ही बाजारों में पतंग बिकने शुरू हो चुके हैं। वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली के बाजारों में जानलेवा चीनी मांझे बिकने शुरू हो चुके हैं। इस मांझे को चोरी-छिपे धागा 302 जैसे कोड वर्ड के नाम से बेचा जा रहा है। दुकानदार अधिक कीमत लेकर पहले से बुकिंग कर खरीदारों को तय स्थान पर मांझे की डिलीवरी दे रहे हैं। हर साल की तरह इस साल भी पतंगबाजी के शौक में युवा जान को खतरे में डाल डालकर चीनी मांजे खरीद रहे हैं। प्रशासन की नजरों से बचकर दुकानदारों ने चीनी मांझे को बेचना शुरू कर दिया है।


दुकानदार ऊंचे दाम पर बेच रहे मांझा।


बता दें कि पुरानी दिल्ली के मशहूर लाल कुआं बाजार में चीनी मांझा चुपके से बेचा जा रहा है। इसके लिए दुकानदार लोगों से ऊंची कीमत वसूल रहे हैं, जहां एक चरखी की कीमत 800 से 1300 रुपये तक है। दुकानदार खरीदारों को पहले से ऑर्डर देने के लिए कह रहे हैं। पिछले वर्षों में इस मांझे की चपेट में आने से कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद, इसकी बिक्री को लेकर लापरवाही की जा रही है। ये मांझा न केवल बेजुबान जानवरों बल्कि इंसानों की जान के लिए भी खतरा बन रहा है।


इन जगहों पर बिक रहा जानलेवा मांझा


वहीं, तुर्कमान गेट और ओखला सदर बाजार में मांझे की बिक्री शुरू हो चुकी है। पतंग और मांझा बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि चीनी मांझा अब खुले तौर पर नहीं, बल्कि पहले से बुकिंग कर बेचा जा रहा है। दुकानदारों ने बताया कि वे यह मांझा चरखी में नहीं, बल्कि सादे कागज में लपेटकर बेच रहे हैं। तुर्कमान गेट के एक दुकानदार का कहना है कि चीनी मांझा खरीदने के लिए पहले व्हाट्सएप पर ऑर्डर करना जरूरी है और इसके साथ डिलीवरी के लिए अलग से पैसा देना पड़ता है। लाल कुआं बाजार में पतंग और मांझा खरीदने आए लोगों ने बताया कि चीनी मांझा उपलब्ध तो है, लेकिन इसके लिए पहले से ऑर्डर देना जरूरी है। 

Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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