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कोर्ट के दरवाजे तक पहुंचा शंकराचार्य विवाद का मामला, अधिकारियों को लेकर हो रही बड़ी मांग


Shankracharya Awimukteshwaranand Row: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और माघ मेला प्रशासन का विवाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने इलाहबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के समक्ष याचिका दाखिल कर उन्होंने प्रयागराज, डीएम, पुलिस कमिश्नर और मेला अधिकारी को निलंबित करने का आदेश देने की मांग की है।


याचिका में नाबालिग बटुकों को हिरासत में रखकर उनसे मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। वहीं, विवाद होने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर ही सवाल उठा दिए गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि वह शंकराचार्य नहीं हैं। 


मौनी अमावस्या के दिन हुआ विवाद  


याचिकाकर्ता के अनुसार माघ मेला सनातन धर्म का पवित्र उत्सव है। इसमें मौनी अमावस्या का स्नान सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस बार मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब संगम स्नान के लिए शिष्यों के साथ पालकी से जा रहे थे तभी प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के बीच नोकझोक हुई थी। अधिकारियों ने शंकाराचार्य को पालकी से उतर कर स्नान करने के लिए जाने को कहा। हालांकि, शंकराचार्य ने ऐसा करने से मना कर दिया, जिसके बाद विवाद हो गया था।


पुलिस पर क्या आरोप लगे


वहीं, शंकराचार्य का आरोप है कि साथ चल रहे 11से 14 वर्ष के बटुकों को हिरासत में लेकर मारा-पीटा गया और उनकी शिखा पकड़ कर घसीटा गया। नाबालिग बटुकों से ऐसी बर्बरता जुवेनाइल जस्टिस एंड प्रोटेक्शन एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन होने के साथ दंडनीय अपराध है। बटुकों की शिखा खींचना सनातन धर्म को अपमानित करना है। मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का हवाला देकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पद को लेकर सवाल उठाए हैं।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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