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उन्नाव रेप मामले में आरोपी कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट से मिली जमानत, CBI पहुंचा सुप्रीम कोर्ट; याचिका दायर


Unnao Rape Case Accused Kuldeep Sengar:उन्नाव रेप मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी, जिसके बाद CBI ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने सेंगर की अपील लंबित रहने तक उनकी सजा को निलंबित कर दिया, जिससे पीड़िता के परिवार और जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया। CBI स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल करने की तैयारी में है, ताकि हाईकोर्ट के आदेश को पलटा जा सके


क्या है उन्नाव रेप मामला?


बता दें, यह मामलाउन्नाव जिले का है, जहां 2017 में एक नाबालिग लड़की ने कुलदीप सेंगर और उनके साथियों पर अपहरण, बलात्कार और धमकी देने का आरोप लगाया था। जिसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई और 2019 में दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 363 (अपहरण), 366 (शादी के लिए मजबूर करना) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(सी)/6 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।


इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। सेंगर पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में भी 10 साल की सजा काट रहे हैं। अपील में सेंगर ने पीड़िता की उम्र (नाबालिग होने पर सवाल) और अपने एलिबाई (सेल टावर डेटा से अनुपस्थिति) पर बहस की है।


दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला


इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में शामिल जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर) ने सीआरपीसी की धारा 389 के तहत सेंगर की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित किया। कोर्ट ने कहा कि सेंगर को पॉक्सो एक्ट की धारा 5(सी) के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि विधायक होने के बावजूद वे IPC की धारा 21 के तहत ‘पब्लिक सर्वेंट’ की परिभाषा में नहीं आते। इससे अपराध पॉक्सो की बेसिक धारा 3/4 के अंतर्गत आता है, जहां 2019 से पहले न्यूनतम सजा 7 साल थी।


सेंगर ने 30 नवंबर 2025 तक करीब 7 साल 5 महीने जेल में बिताए हैं, जो न्यूनतम सजा से ज्यादा है। इससे संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि अपील 17 जनवरी 2020 से लंबित है और इसमें देरी हो रही है। अपील में मजबूत तर्क हैं, जैसे पीड़िता की उम्र पर मेडिकल रिपोर्ट्स (19 साल से ज्यादा बताने वाली) और स्कूल रिकॉर्ड्स में असंगति। कोई मेडिकल आधार पर जमानत नहीं दी गई, बल्कि कानूनी मेरिट पर।


सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर


CBI ने हाईकोर्ट के आदेश की समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने का फैसला किया है। एजेंसी का कहना है कि सेंगर को ‘पब्लिक सर्वेंट’ न मानना गलत है और इससे पीड़िता व परिवार की सुरक्षा को खतरा है। हाईकोर्ट में भी CBI ने जमानत का विरोध किया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में जल्द याचिका दायर की जाएगी। पीड़िता के वकील ने सुनवाई में सुरक्षा चिंताएं उठाईं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि पुलिस की क्षमता पर संदेह से कैद नहीं रखा जा सकता।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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