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उत्तराखंड में फिर बरसी आफत, बादल फटने से चमोली के 3 गांवों में तबाही; लापता लोगों की तलाश जारी


Chamoli Cloudburst: उत्तराखंड एक बार फिर प्रकृति की मार झेल रहा है। सोमवार रात से शुरु हुए तबाही रुकने का नाम नहीं ले रही है। देहरादून के बाद अब चमोली जिले के नंदानगर घाट क्षेत्र में बुधवार रात को दो अलग-अलग जगहों से बादल फटने की घटना सामने आई है। इस आपदा ने कम से कम तीन गांवों नंदानगर, धुरमा और आसपास के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां छह से अधिक घर मलबे में दफन हो गए। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि दो को सुरक्षित बचा लिया गया है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं, लेकिन भारी बारिश और मलबे की वजह से राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।


उत्तराखंड में बादल फटने का कहर जारी


बता दें, बुधवार रात करीब 2:30 बजे नंदानगर के कुंतरी लंगाफाली वार्ड में पहला बादल फटने की घटना घटी। अचानक भारी वर्षा से उत्पन्न उफान ने छह घरों को मलबे में दफना दिया, जिसमें कई परिवार फंस गए। चमोली जिला मजिस्ट्रेट संदीप तिवारी ने बताया ‘आपदा की चपेट में आकर 07लोग लापता हो गए, जबकि दो को जीवित निकाला गया। धुरमा गांव में भी दूसरी घटना ने भारी नुकसान पहुंचाया, जहां भवनों और सड़कों को क्षति पहुंची।’ कुछ रिपोर्ट्स में लापता लोगों की संख्या 10 तक बताई जा रही है, जो स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को शामिल कर सकती है। 


कई गांव हुए तबाह


आपदा की सबसे ज्यादा मार नंदानगर घाट पर पड़ी, जहां कुंतरी वार्ड के अलावा धुरमा गांव भी तबाह हो गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि मलबे और मिट्टी का भारी बहाव रातोंरात आया, जिससे घरों के साथ-साथ दुकानें, वाहन और खेती-बाड़ी का सामान भी बह गया। उन्होंने बताया कि रात के अंधेरे में पानी और पत्थरों का शोर सुनाई दिया, लेकिन भागने का मौका ही न मिला। तीनों गांवों में करीब 20-25 परिवार प्रभावित हुए हैं।’


इसके अलावा सड़कें कट जाने से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। नंदानगर-जोशीमठ मार्ग पर भूस्खलन के कारण यातायात ठप है, और चार धाम यात्रा पर भी असर पड़ा है। अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में खतरा मंडरा रहा है। वहीं, IMD ने चमोली सहित कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें 20 सितंबर तक भारी से अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जहां बादल फटना सामान्य वर्षा से कहीं अधिक तीव्र होता है।


राहत-बचाव कार्य जारी


आपदा के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने तुरंत SDRF, NDRF और स्थानीय पुलिस की टीमें तैनात कर दीं। गुरुवार सुबह तक दो लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है, लेकिन बाकी लापता लोगों की तलाश जारी है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून से स्थिति की समीक्षा की और केंद्र सरकार से सहायता का आग्रह किया। उन्होंने कहा ‘हमारी सरकार प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है। सेना और अन्य एजेंसियां युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं।’  

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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