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सिब्बल-सिंघवी के वक्फ कानून पर दिए दलीलों पर SC ने क्या कहा? यहां जानें सुनवाई के पहले दिन क्या-क्या हुआ?

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Waqf Amendment Act: सुप्रीम कोर्ट में आज वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इन याचिकाओं की सुनवाई CJI संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से वक्फ बाय यूजर संपत्तियों के प्रावधान को लेकर कई सवाल पूछे हैं। इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि अगर 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच बनी मस्जिदों के कागजात नहीं हैं तो उनका रजिस्ट्रेशन कैसे होगा? कोर्ट ने इस मुद्दे पर भी जवाब मांगा है। बता दें, इस मामले की अगली सुनवाई कल दोपहर 2 बजे होगी। आइए जानते है वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं किसने क्या कहा?


सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?


बता दें, वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आज कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। इसके अलावा अदालत ने कहा ‘जो भी संपत्ति उपयोगकर्ता या कोर्ट द्वारा वक्फ घोषित की गई है, तो उसे अधिसूचित नहीं किया जाएगा।  


वक्फ कानून पर क्या बोले कपिल सिब्बल?


इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है। बता दें, संविधान का अनुच्छेद 26 धार्मिक समुदायों को अपने धार्मिक मामलों की देखरेख की आजादी देता है। कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि वक्फ केवल सरकार कैसे बना सकती हैं, ये कैसे तय किया जा सकता है?


कपिल सिब्बल का कहना है कि इस्लाम में उत्तराधिकार का अधिकार मृत्यु के बाद मिलता है। लेकिन वक्फ कानून उससे पहले ही हस्तक्षेप कर रहा है। सिब्बल ने कहा ‘वक्फ कानून के तहत 20 करोड़ लोगों के अधिकारों को छीना जा सकता हैं।’ सिब्बल की दलीलों पर CJI संजीव खन्ना ने जवाब दिया ‘अगर किसी संपत्ति को प्राचीन स्मारक घोषित करने से पहले वक्फ घोषित किया गया था, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’


अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा?


इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कई दलीलें दीं हैं। अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से पूछा ‘संसद की जमीन भी वक्फ की है।’ सिंघवी ने कहा ‘8 लाख में से 4 वक्फ हैं, जो उपयोगकर्ता के द्वारा हैं।’ ऐसे में वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद इन संपत्तियों के लिए बढ़ सकता है।’


जिस पर CJI खन्ना ने कहा ‘हमारा कहना यह है कि सभी वक्फ गलत तरीके से पंजीकृत हैं। लेकिन इसी के साथ कुछ चिंताएं भी हैं।’ CJI खन्ना ने सुझाव दिया कि इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट को सौंपी जा सकती है। 


SC ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब


सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से वक्फ बाय यूजर की संपत्ति को लेकर सवाल पूछा है। अदालत ने केंद्र सरकार से वक्फ बाय यूजर प्रावधानों को हटाए जाने पर जवाब मांगा है। इस मुद्दे पर अदालत ने कहा ‘वक्फ बाय यूजर’ घोषित होगा या नहीं। अगर घोषित होता है तो वक्फ बाय यूजर संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन कैसे होगा।’ बता दें, जो संपत्ति लंबे समय से धार्मिक उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाई जा रही हो, उस संपत्ति को वक्फ माना जाता है। फिर चाहे उसके पास संपत्ति से जुड़़े कोई आधिकारिक दस्तावेज हो या ना हो। उसे वक्फ बाय यूजर कहा जाता है।


इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि अगर 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच बनी मस्जिदों के कागजात नहीं हैं तो उनका रजिस्ट्रेशन कैसे होगा? कोर्ट ने इस मुद्दे पर भी जवाब मांगा है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के प्रावधान पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा ‘क्या वह हिंदू ट्रस्टों में मुसलमानों को शामिल करने की अनुमति देगा?’ कोर्ट का कहना है कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल नहीं किया जाएगा तो क्या केंद्र हिंदू ट्रस्टों में मुसलमानों को शामिल करेगा?

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