बदायूं के कदारचौक इलाके के लभरी गांव में राम जानकी मंदिर से सटी जमीन को पट्टे पर दिए जाने का विरोध हो रहा है। जमीन की पैमाइश (नाप-जोख) से नाराज महंत ने ‘जीवित समाधि’ लेने का ऐलान कर दिया और समाधि के लिए खोदे गए गड्ढे में जाकर बैठ गए।
शनिवार को जब नायब तहसीलदार की मौजूदगी में लेखपाल और कानूनगो ने इस जमीन की पैमाइश की, तो ग्रामीण भड़क गए। इसके विरोध में महंत प्रयागदास ने ‘जीवित समाधि’ लेने की बात कही। रविवार को वे समाधि के लिए खोदे गए गड्ढे में जाकर बैठ गए।
ग्रामीणों के अनुसार, चकबंदी प्रक्रिया से पहले राम जानकी मंदिर से सटी यह जमीन मंदिर की ही मानी जाती थी। मंदिर परिसर से जुड़ी इस जमीन का इस्तेमाल लंबे समय से धार्मिक आयोजनों, मेलों और ‘नखासा’ (पशुओं के बाजार) के लिए होता आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन हमेशा से मंदिर के कब्जे और इस्तेमाल में रही है। उनका आरोप है कि बाद में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान प्लॉट नंबर बदल दिए गए और इस जमीन को दूसरों को पट्टे पर दे दिया गया।


