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धड़कन तेज़ होने पर सावधान: जानें क्यों कम उम्र में हार्ट अटैक और मौतें बढ़ीं — क्या है कारण उपाय?

फिल्मों में दिल की तेज़ धड़कन को अक्सर प्यार का पहला संकेत दिखाया जाता है। लेकिन असल ज़िंदगी में यह एक मेडिकल समस्या का संकेत है। इसे नज़रअंदाज़ करना हार्ट अटैक को दावत देने जैसा है। SN मेडिकल कॉलेज में कार्डियक प्रोसीजर (दिल का इलाज) करवाने वाले 21 प्रतिशत मरीज़ युवा थे जिन्होंने चेतावनी के संकेत मिलने के बावजूद इलाज नहीं करवाया था।

पिछले 18 महीनों में SN मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग की कैथ लैब में 2402 मरीज़ों का कार्डियक इलाज किया गया जिसमें 1429 एंजियोग्राफी, 785 एंजियोप्लास्टी और 188 पेसमेकर इम्प्लांटेशन शामिल थे। इनमें से 21 प्रतिशत मरीज़ 35 साल से कम उम्र के थे। 30 प्रतिशत मरीज़ 36-50 साल के, 32 प्रतिशत 51-70 साल के और बाकी 70 साल से ज़्यादा उम्र के थे।

युवा मरीज़ों से पूछताछ करने पर पता चला कि यह स्थिति करियर और नौकरी से जुड़ा तनाव, देर रात तक जागना, फास्ट-फूड खाना, धूम्रपान, शराब का सेवन और मोटापा जैसी वजहों से जुड़ी थी। उन्हें अक्सर सीने में दर्द, दिल की धड़कन का अनियमित होना, सांस फूलना और घबराहट जैसे लक्षण महसूस होते थे लेकिन उन्होंने इन्हें मामूली समस्या समझा और आखिरकार उन्हें हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा।

28 साल के मरीज़ का कार्डियक प्रोसीजर

कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. बसंत गुप्ता ने बताया कि कैथ लैब में कार्डियक प्रोसीजर करवाने वाले हर 5 में से एक मरीज़ की उम्र 35 साल से कम है। सबसे कम उम्र का मरीज़ 28 साल का था। इन मरीज़ों में ज़्यादा वज़न, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज़ और तनाव जैसी समस्याएं थीं। लक्षण दिखने के बाद भी उन्होंने मेडिकल जांच नहीं करवाई थी। अगर आपकी धड़कन अनियमित है तो ECG करवाएं

हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. सौरभ नागर सलाह देते हैं कि अगर आपको धड़कन का तेज़ महसूस होना (palpitations), बेचैनी या सीने में दर्द जैसी समस्या हो, तो इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से सलाह लें और ECG करवाएं क्योंकि इससे अक्सर स्थिति का पता लगाने में मदद मिल सकती है। 30 साल की उम्र के बाद ECG और 40 साल की उम्र के बाद इकोकार्डियोग्राम (इको) करवाना चाहिए।

स्वस्थ लोग की ये है मानक

  • धड़कन: 60-100 बार
  • पुरुष: 70-75 महिला: 80-85
  • रक्तचाप: 120/80 एमएमएचजी
  • हाईबीपी: 140/90 एमएमएचजी से अधिक होना।
  • नमक: दो से तीन ग्राम
  • चीनी: दो से पांच ग्राम

ये लक्षण दिखे तो कराएं ईसीजी

  • सीने में भारीपन, तेज दर्द होना। दर्द बाएं हाथ, जबड़े या गर्दन तक पहुंचना।
  • थोड़ी दूरी चलने या एक-दो सीढ़ियां चढ़ने पर अचानक सांस फूलना।
  • थोड़ा काम करने पर थकान होना, कमजोरी महसूस करना, घबराहट होना।
  • चक्कर आना, पसीना आना, बेहोश हो जाना, पेट-पैरों में असामान्य सूजन।

इन बातों का रखें ध्यान

  • रोजाना 5 से 10 हजार कदम पैदल चलना।
  • छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करना।
  • तले हुए भोजन, फास्टफूड से पेट नहीं भरना।
  • धूम्रपान शराब से बचें, 6-8 घंटे स्वस्थ नींद।
  • मोबाइल टीवी, लैपटॉप का देर रात तक उपयोग न करें।
  • हरी सब्जी, दाल, फल, मोटा अनाज, ड्राईफ्रूट्स खाएं

एसएन की कैथ लैब में हृदय की सर्जरी के आंकड़े

  • 2402: हृदय ऑपरेशन
  • 1429: एंजियोग्राफी
  • 785: एंजियोप्लास्टी
  • 188: पेसमेकर

इस उम्र के हैं मरीज

  • 35 से कम: 21 फीसदी
  • 36-50: 30 फीसदी
  • 51-70: 32 फीसदी
  • 70 से अधिक: 17 फीसदी
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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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