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‘छुट्टियों के दिन भी फैसले लिख रहे होते…’, बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में छलका उठा जजों का दर्द


Supreme Court Judges:सुप्रीम कोर्ट के बार एसोसिएशन की कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों का दर्द का छलक उठा। जस्टिस बीवी नागरत्ना का बयान अब चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि हम छुट्टियों के दिन भी जजमेंट लिख रहे होते हैं।


जस्टिस दीपांकर दत्ता ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि हमें 10.30से 4बजे तक लगातार अपने काम पर फोक्स करना पड़ता है लेकिन, हमारे दिमाग को भी आराम की जरूरत होती है। जस्टिस दीपांकर ने यह भी कहा कि जजों की न्यायिक कामकाज की अवधि से बाहर जाकर फैसला सुनाने का दवाब झेलना पड़ता है।


जस्टिस बीवी नागरत्ना ने क्या कहा


जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि जजों का कार्यभार केवल कोर्ट की सुनवाई तक सीमित नहीं रहता। जज कोर्ट की छुट्टी का उपयोग आराम करने की बजाए लंबित फैसले लिखने में करते हैं। उन्होंने कहा कि फैसला सुनाने का काम कोर्ट के टाइम टेबल से आगे तक चलता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि शाम तक जज कोर्ट में बैठकर सुनवाई, ट्रायल और मामलों का निपटारा करते हैं। उन्होंने कहा कि देर रात तक, गर्मियों की छुट्टियां, दशहरे की छुट्टी, होली और क्रिसमस की छुट्टियों के दिनों में आराम करने के बजाए फैसले लिखने में लगे रहते हैं।


जस्टिस दीपांकर ने भी रखी अपनी बात  


जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि आप जानते हैं, जब कोई जज सुबह 10:30बजे से शाम 4बजे तक लगातार मामलों की सुनवाई करता है। तो उतने समय तक उसे पूरी तरह मामले पर ध्यान केंद्रीत रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दिमाग को आराम की जरूरत होती है। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि लोग न्याय देने को एक दैवीय काम समझते हैं।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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