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73 दिनों तक चीन के सामने डटी रही भारतीय सेना, डोकलाम टकराव पर राहुल गांधी बोले


Rahul Gandhi statement on Doklam Standoff: भारत और चीन के बीच सीमा विवादों की एक लंबी श्रृंखला में डोकलाम स्टैंडऑफ एक अहम अध्याय है। साल 2017में सिक्किम सीमा के पास डोकलाम पठार पर 73दिनों तक चला यह टकराव न केवल दोनों देशों की सैन्य ताकत का परीक्षण था, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा भी साबित हुआ। वहीं, आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में इस मुद्दे को फिर से उठाया और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने की अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सेना को सब कुछ मालूम है, लेकिन सरकार तथ्यों को छिपा रही है।


लोकसभा में उठा डोकलाम का मुद्दा


02फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी ने डोकलाम का जिक्र किया। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर लिखा है कि साल 2020के लद्दाख स्टैंडऑफ में सरकार ने सेना को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए। उन्होंने कहा ‘हर जवान जानता है कि आप जनता से क्या छिपा रहे हैं।’ उन्होंने डोकलाम में चीनी टैंकों के घुसने का जिक्र किया और सरकार पर आरोप लगाया कि वह किताब को प्रकाशित होने से रोक रही है।


राहुल गांधी के इन आरोपों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा विरोध जताया। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से किताब की प्रामाणिकता साबित करने को कहा, जिसके बाद सदन में हंगामा शुरु हो गया। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को ‘प्रामाणिक स्रोत’ से ही बोलने की हिदायत दी, लेकिन राहुल गांधी ने जारी रखा। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है और सरकार घबरा रही है।


क्या है डोकलाम विवाद?


बता दें, डोकलाम पठार भारत, चीन और भूटान के ट्राइजंक्शन पर स्थित एक रणनीतिक क्षेत्र है। चीन इसे अपना हिस्सा मानता है और इसे ‘डोंगलांग’ कहता है, जबकि भूटान इसे अपना क्षेत्र बताता है। भारत के लिए यह इलाका इसलिए जरूरी है क्योंकि यह ‘चिकन नेक’ या सिलिगुड़ी कॉरिडोर के करीब है, जो पूर्वोत्तर भारत को बाकी देश से जोड़ता है। अगर चीन यहां नियंत्रण कर लेता, तो भारत की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता।


16जून 2017को चीनी सेना ने डोकलाम में एक मौजूदा सड़क को दक्षिण की ओर बढ़ाने की कोशिश शुरू की। निर्माण वाहनों और सड़क बनाने के उपकरणों के साथ चीनी सैनिकों ने काम शुरू किया, जो भूटान की संप्रभुता का उल्लंघन था। भारत, जो भूटान का निकट सहयोगी है, ने इसे खतरा मानते हुए हस्तक्षेप किया। जिसके बाद 18जून को लगभग 270भारतीय सैनिकों ने दो बुलडोजरों के साथ सीमा पार कर चीनी निर्माण को रोक दिया। यह ‘ऑपरेशन जुनिपर’ का हिस्सा था।


भारतीय सेना की बहादुरी


यह स्टैंडऑफ कुल 73दिन यानी 28अगस्त 2017तक चला। दोनों पक्षों के सैनिक आमने-सामने खड़े रहे, लेकिन कोई बड़ा संघर्ष नहीं हुआ। चीनी मीडिया ने भारत को धमकी दी, जबकि भारत ने शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। भारतीय सेना ने बिना पीछे हटे मजबूती से अपना मोर्चा संभाला।


भारतीय सेना की दृढ़ता ने चीन को पीछे हटने पर मजबूर किया। 28 अगस्त को दोनों पक्षों ने सैनिकों को पीछे हटाने का ऐलान किया, जिसके बाद स्थिति पहले जैसी हो गई। और स्थिति पहले जैसी हो गई। भारत ने इसे अपनी जीत माना, क्योंकि चीन को सड़क निर्माण रोकना पड़ा।

Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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