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पॉल्यूशन कर रहा मेंटल हेल्थ को खराब, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

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Delhi Pollution: दिल्ली में ठंड बढ़ने के साथ-साथ प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है। इस वजह से हमारे दिमाग में भारीपन, चिड़चिड़ापन और तनाव भी बढ़ता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि पॉल्यूशन बढ़ने से लोगों का मूड ज्यादा अस्थिर होता है और मानसिक थकान तेजी से बढ़ती है। नए शोध बताते हैं कि ये हमारे दिमाग, मूड और लांग टर्म में मानसिक सेहत भी प्रभावित करता है। अचानक बदलते मौसम से डिप्रेशन और एंजायटी की समस्या हो सकती है। वहीं, लंबे समय के प्रदूषण की वजह से डिमेंशिया जैसे न्यूरो-डिजेनरेटिव रोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।


बच्चों के दिमाग के लिए खतरनाक


नेचर में प्रकाशित एक स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि हाई PM2.5 से थोड़ी देर के एक्सपोजर के कुछ घंटों के भीतर उच्च-स्तरीय सोच में गिरावट पाई गई। आसान शब्दों में कहें तो तीव्र प्रदूषण वाले दिनों में फैसला लेने और जटिल कामों की क्षमता को प्रभावित हो सकती है। वहीं, लंबे समय का एक्सपोजर बच्चों और बुजुर्गों के कॉग्निटिव फंक्शन को कमजोर करता है। कई समीक्षाओं और आबादी-आधारित अध्ययनों ने PM2.5 और अन्य वायु प्रदूषकों को डिप्रेशन, एंग्जायटी और समय के साथ कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट बढ़ा सकता है।


कई बीमारियों का रहता है खतरा


सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ राजीव मेहता बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में ठंड के साथ प्रदूषण बढ़ने के दौरान डिप्रेशन और एंजायटी के केस बढ़े हैं। जैसे कुछ लोगों में सफाई पसंद करने की प्रवृत्ति होती है, लेकिन जब बाहर धुंध और धुआं छाया रहता है और पता होता है कि ये हानिकारक कण हैं तो अंदर घिन और बेचैनी पैदा होती है। सांस लेने में तकलीफ होती है तो घबराहट और बढ़ जाती है। ये सभी फैक्टर मूड को खराब कर सकते हैं। यही नहीं प्रदूषक कण दिमाग तक पहुंचकर नर्व सेल्स को नुकसान भी पहुंचाते हैं।  

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