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इंतजार हुआ खत्म! इस दिन से शुरु होगी देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, रेलमंत्री ने किया ऐलान

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Vande Bharat Sleeper Train:भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेन’ अब जल्द ही पटरी पर दौड़ने को तैयार है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में पुष्टि की है कि इस ट्रेन का पहला संस्करण दिसंबर 2025 में लॉन्च किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ट्रेन के प्रोटोटाइप में कुछ मामूली सुधार किए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों को बेहतर आराम और सुरक्षा मिल सके। बता दें, पहले अक्टूबर में लॉन्च की उम्मीद थी, लेकिन टेस्टिंग के दौरान आई कमियों को दूर करने के लिए इसमें देरी हुई।


लॉन्च में देरी के कारण और सुधार


ट्रेन के प्रोटोटाइप की व्यापक टेस्टिंग के बाद, रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) और कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने कुछ बदलाव सुझाए। इनमें बोगी की गति, सीटों की एर्गोनॉमिक्स और यात्री आराम से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। रेलमंत्री वैष्णव ने कहा ‘टेस्टिंग के दौरान जो मुद्दे सामने आए, उन्हें हम पहले और दूसरे रेक में ठीक कर रहे हैं। हम शॉर्टकट्स में विश्वास नहीं करते, क्योंकि हमें अगली पीढ़ी के लिए एक अच्छा उत्पाद बनाना है।’


जानकारी के अनुसार, इन सुधारों में आर्क फॉल्ट डिटेक्शन डिवाइस की स्थापना, एसी डक्ट की पोजिशनिंग, CCTV के लिए फायर-सर्वाइवल केबल्स, यूरोपीय फायर सेफ्टी और क्रैशवर्थीनेस स्टैंडर्ड्स (EN 45545 और EN 15227) का थर्ड-पार्टी ऑडिट और स्लीपर कोच में इमरजेंसी अलार्म बटन को आसान पहुंच वाली जगह पर शिफ्ट करना शामिल है। ये बदलाव बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) में किए जा रहे हैं, जहां शुरुआती 10 स्लीपर रेक बनाए जा रहे हैं।


ट्रेन की मुख्य विशेषताएं


बता दें, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को सेमी-हाई स्पीड ओवरनाइट यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है, जो 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। यह 16 कोच वाली प्रोटोटाइप है, जिसे बाद में 24 कोच तक बढ़ाया जा सकता है। ट्रेन में कुल 823 यात्रियों की क्षमता है, जिसमें 67 स्लीपर बर्थ शामिल हैं। सभी कोच पूरी तरह एयर-कंडीशंड हैं। यह ट्रेन वंदे भारत की उन्नत तकनीक को लंबी दूरी की रात की यात्रा के लिए अनुकूलित करती है, जिसमें आधुनिक फायर सेफ्टी फीचर्स जैसे आर्क फॉल्ट डिटेक्शन, बेहतर एसी डक्ट प्लेसमेंट और फायर-सर्वाइवल CCTV केबल्स शामिल हैं। ट्रेन का निर्माण बीईएमएल और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) के सहयोग से किया गया है और एक रेक की लागत लगभग 120 करोड़ रुपये है।


ट्रेन के प्रोटोटाइप का परीक्षण


ट्रेन के प्रोटोटाइप का परीक्षण उत्तर मध्य रेलवे (महोबा-खजुराहो), पश्चिम मध्य रेलवे (सवाई माधोपुर-कोटा-नागदा) और पश्चिम रेलवे (अहमदाबाद-मुंबई) जोनों में किया गया। इन ट्रायल्स में 180 किमी प्रति घंटे की स्पीड, ब्रेकिंग सिस्टम, स्थिरता और अन्य सिस्टम्स की जांच की गई, जो आरडीएसओ की निगरानी में सफल रही। अब रेट्रोफिटिंग पूरी होने के बाद, ट्रेन को विश्व स्तरीय मानकों पर खरा उतारने के लिए तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि दिसंबर की समयसीमा पर काम चल रहा है और यह लंबी दूरी की प्रीमियम यात्रा को बेहतर बनाएगी।  

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