Thursday, May 7, 2026
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HomeUTTAR PRADESHदेश के नामी कवियों ने अशोक सिंघल जी को दी काव्यांजलि

देश के नामी कवियों ने अशोक सिंघल जी को दी काव्यांजलि

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लखनऊ। स्वामी विवेकानंद के उद्घोष ‘गर्व से कहो हम हिंदू हैं’ को जन-जन का स्वर बनाने वाले विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अध्यक्ष रहने वाले अशोक सिंघल जी की 98वीं जयंती पर एक भव्य काव्यांजलि का आयोजन किया गया। गोमतीनगर स्थित सीएमएस स्कूल के सभागार में इस पावन अवसर पर प्रसिद्ध कवियों द्वारा काव्य पाठ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सचिव चंपत राय जी ने कहा कि अशोक सिंघल जी के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि जीवन में लक्ष्य बना लेने के बाद उसकी पूर्ति ही मिशन बन जाता है।

कार्यक्रम के आरंभ में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नरेन्द्र भदौरिया जी ने भारत माता के अनन्य पुजारी एवं हिंदुत्व को आंदोलन बनाने वाले सिंघलजी का राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण में प्रयासों का वर्णन किया। इसके उपरांत श्रद्धेय अशोक सिंघल स्मृति न्यास की ओर से आयोजित इस काव्यांजलि को गति देते हुए शिखा भार्गव जी ने अशोक सिंघल जी के बारे में कहा कि लखनऊ आगमन पर वह न्यास के ट्रस्टी प्रदीप भार्गव जी के घर पर ही ठहरते थे। लखनऊ आगमन पर वह भार्गव निवास पर ही सभाओं का आयोजन करते थे। देर रात तक पुस्तकें पढ़ते थे।

न्यास की संरक्षक श्रीमती अचला भार्गव ने सिंघलजी को श्रद्धांजलि देते हुए एक मार्मिक कविता का पाठ किया। उन्होंने बताया कि अशोक सिंघल स्मृति न्यास की स्थापना की गई है जिसके माध्यम से उनके महान कार्यों को जन जन तक पहुंचाने का कार्य किया जाता है। इसके ट्रस्टीज में अभिनव भार्गव व प्रशांत भाटिया आदि हैं।

मुख्य अतिथि चंपत राय जी ने कहा कि जीवन में लक्ष्य तय कर लेने के बाद उसे सफल करने के लिए प्रयास करने की प्रेरणा और उसे सफल होते देखने की प्रेरणा हमें सिंघलजी के जीवन से मिलती है। अशोकजी एक साधारण मनीषी होने के बाद भी असाधारण कार्य करने में सफल रहे। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्वेत वस्त्र धारण करने वाले आदरणीय सिंघलजी का जीवन सादगी की मिसाल था। उन्होंने देश में बड़े बड़े कई कार्य किए, वह भी कानपुर में मात्र एक तख्त बराबर कमरे में रहते हुए। ऐसे समाजसेवी के जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

तदोपरांत, अयोध्या के संत कमल नयन दास जी ने कहा कि सिंघलजी की इच्छा शक्ति दृढ़ थी। उन जैसे महापुरुष अपने संकल्प से जनमानस की सेवा करते हैं। राम मंदिर का स्वप्न साकार करने के लिए उन्होंने जीवन खपा दिया। उनके ही संकल्प का परिणाम है कि आज देशभर में वेदाध्ययन के विद्यालय खुलते जा रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन में समता और समरसता का प्रचार करने का संकल्प ले रखा था।

इसके पश्चात विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश जी ने सिंघलजी के संपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए, उनके प्रयासों से भारत में हुए हिंदुत्व के उदय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं, प्रसिद्ध कवि हरिओम पवार जी ने कहा कि मैंने एक बार सिंघल जी को भाषण देते हुए सुना था। संभव है कि उसी कारणवश मेरी कविताओं में राष्ट्रवाद का पुट मिलता है। उन्होंने कहा कि भले ही मैं संघ का कोई सक्रिय सदस्य नहीं रहा हूं लेकिन मुझे इसका पूरा विश्वास है कि संघ के ऐसे ही महान मनीषियों के चलते आज भी हमारे देश में संस्कृति संरक्षित है। इसके बाद उन्होंने अपने परिचय के अनुरूप ही वीर रस की कविता पढ़ते हुए कश्मीर का स्वप्न देखना बंद करो…काव्य का पाठ कर श्रोताओं को जोश से भर दिया।

इस अवसर पर कवि जगदीश मित्तल, व्यासजी, प्रमोद द्विवेदी, अतुल नारायण, बौखल जी एवं सोनी मिश्र ने अपनी रचनाओं से सबका हृदय जीत लिया।

कार्यक्रम में लखनऊ की पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया, महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, अवध प्रांत प्रचारक कौशल जी, महापौर सुषमा खर्कवाल, दिनेश जी, मनोजकांत जी, विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह, सूचना आयुक्त पीएन द्विवेदी, आरएसएस के सह प्रांत प्रचारक संजय जी, अपर महाधिवक्ता विमल श्रीवास्तव, मीनाक्षी परिहार, सिंधी आयोग के उपाध्यक्ष नारद चंद, एडवोकेट बीके सिंह आदि ने अपनी उपस्थिति से काव्यांजलि को यादगार बना दिया।

कवियों ने बांधा समां…
काव्यांजलि का आरंभ करते हुए डॉ हरिओम पवार जी ने उरी का उत्तर घर में घुसकर…पढ़कर श्रोताओं में जोश भर दिया। वहीं, कवि अभय सिंह निर्भीक ने भारत भू का नक्शा…कविता का पाठ किया। तत्पश्चात विकास बौखल जी ने कहा कि हिंद वाले शेर पाक जाके काव्य का पाठ किया। कवि प्रमोद द्विवेदी ने खोजें कहीं परंतु राम…कविता पढ़कर सबको भावविभोर कर दिया। इसी क्रम में अतुल नारायण ने वीरपुत्र थे राम भक्त थे हिंदू के रखवाले थे…कविता का वाचन किया। इसके बाद कवित्री सोनी मिश्र ने प्रेम को जानना है यदि तुमको तो राधेमोहन की प्रीति को जानो…का मधुर स्वर में पाठ किया। वहीं, कवि शिवकुमार व्यास जी ने सोच लिया गंगा सम बहना है कविता का पाठ किया। इसमें आरएसएस एवं विहिप के वरिष्ठ सदस्यों सहित बड़ी संख्या में रामभक्त व राष्ट्रभक्त काव्य सुनने को एकत्र हुए।

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