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इस बार साधु संग होंगे तीन अमृत स्नान, अखाड़ा परिषद ने हरिद्वार अर्धकुंभ की तारीखों का किया ऐलान; लाखों श्रद्धालु होंगे सम्मिलित


Haridwar Ardh Kumbh 2027: उत्तराखंड के पावन नगरी हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ मेले को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अवधूति अखाड़ा परिषद ने घोषणा की है कि इस बार अर्धकुंभ में साधु-संन्यासियों और अखाड़ों के साथ पहली बार तीन शाही स्नान (अमृत स्नान) आयोजित किए जाएंगे। यह परंपरा कुंभ मेले के पूर्ण रूप में तो प्रचलित रही है, लेकिन अर्धकुंभ में ऐसा होने से यह आयोजन कई मायनों में विशेष हो जाएगा। क्योंकि हरिद्वार के अर्धकुंभ में अब तक आम लोग ही कुंभ के दौरान स्नान करते थे। वहीं, परिषद की तरफ से अमृत स्नान की तिथियां का भी ऐलान कर दिया गया है।


14 जनवरी से होगी हरिद्वार अर्धकुंभ की शुरुआत


बता दें, अर्धकुंभ मेला हर 6 वर्षों में एक बार हरिद्वार और प्रयागराज में आयोजित होता है, जो पूर्ण कुंभ (12 वर्षों में एक बार) के बीच की कड़ी का प्रतीक है। 2027 का हरिद्वार अर्धकुंभ 14 जनवरी 2027 से शुरु होकर अप्रैल माह तक चलेगा। पिछले अर्धकुंभ (2021) को कोविड-19 महामारी के कारण सीमित रखा गया था, लेकिन 2027 में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा।


हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से अमृत की बूंदें चार स्थानों पर गिरीं—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर होने वाला यह मेला लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहां पवित्र स्नान से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति का विश्वास है।


तीन शाही स्नान की तिथियां


अखाड़ा परिषद की बैठक में ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर शाही स्नान की तिथियां निर्धारित की गई हैं। ये स्नान नागा साधुओं और अन्य संन्यासी अखाड़ों के लिए सर्वोच्च महत्व के होते हैं, जहां वे शाही जुलूस के साथ गंगा स्नान करते हैं। अर्धकुंभ में सामान्यतः एक या दो शाही स्नान होते हैं, लेकिन इस बार तीन होने से आयोजन को और भव्य बनाया जाएगा।


पहला शाही स्नान: 29 मार्च 2027


यह महाशिवरात्रि के अवसर पर होगा। शिवरात्रि का संयोग इसे विशेष बनाता है, जब लाखों साधु गंगा आरती और भजन-कीर्तन के साथ स्नान करेंगे।


दूसरा शाही स्नान: 04 अप्रैल 2027


यह सोमवती अमावस्या पर निर्धारित है। अमावस्या का पर्व पितरों के श्राद्ध और आध्यात्मिक साधना के लिए जाना जाता है, जिससे यह स्नान मोक्ष प्राप्ति का साधन बनेगा।


तीसरा शाही स्नान: 14 अप्रैल 2027


बैसाखी और मेष संक्रांति के संयोग पर यह सबसे पवित्र दिन होगा। यह स्नान मेले का चरमोत्कर्ष माना जा रहा है, जहां करोड़ों श्रद्धालु भाग लेंगे।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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