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स्वतंत्रता दिवस 2026: 15 अगस्त से पहले उधमपुर के छात्रों ने निकाली तिरंगा रैली

उधमपुर (जम्मू-कश्मीर): 15 अगस्त से पहले उधमपुर में स्वतंत्रता दिवस का देशभक्तिपूर्ण जोश देखने को मिला, जब बड़ी संख्या में छात्राओं समेत कई छात्रों ने तिरंगा रैली में हिस्सा लिया। राष्ट्रीय ध्वज थामे, छात्र और स्थानीय निवासी भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बलिदानों को याद करने के लिए एक साथ आए।

यह रैली संयुक्त रूप से रुकिया पब्लिक स्कूल और मदरसा जामिया रुकिया लिल बनात द्वारा आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में छात्र, स्थानीय निवासी और समुदाय के सदस्य एक साथ आए और उन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जिनके बलिदानों ने भारत की आज़ादी में योगदान दिया।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव के मूल्यों पर भी ज़ोर दिया गया। आयोजकों ने आज़ादी की लड़ाई में अलग-अलग समुदायों के लोगों के योगदान को याद करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

उधमपुर के छात्रों ने तिरंगा रैली में हिस्सा लिया

स्कूल और मदरसे के छात्रों ने रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और तिरंगा लेकर स्वतंत्रता दिवस के आगमन का जश्न मनाया। कार्यक्रम के दौरान छात्राएं विशेष रूप से नज़र आईं, जिससे जश्न का महत्व और बढ़ गया।

प्रतिभागियों ने इस मौके का इस्तेमाल राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उन पीढ़ियों को याद करने के लिए किया जिन्होंने भारत की आज़ादी की लड़ाई में बलिदान दिया था।

उधमपुर मदरसे की छात्रा रिज़वाना ने नागरिकों से तिरंगा रैलियों में भाग लेने और उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “मैं सभी देशवासियों से तिरंगा रैली में भाग लेने और इस 15 अगस्त को एक त्योहार की तरह मनाने का अनुरोध करती हूं। हमें आज जो आज़ादी मिली है, वह हमारे पूर्वजों के बलिदानों की वजह से है।”

उनकी अपील का मकसद लोगों को स्वतंत्रता दिवस के जश्न में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना था, साथ ही उन बलिदानों को याद करना था जिनकी वजह से भारत की आज़ादी संभव हो पाई। स्कूल चेयरमैन ने अलग-अलग समुदायों के योगदान पर ज़ोर दिया

रुकिया पब्लिक स्कूल और चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन राज अली ने कहा कि यह रैली छात्रों और दूसरे लोगों के लिए राष्ट्रीय पर्व मनाने और आज़ादी की लड़ाई में अपनी जान देने वालों को याद करने का एक मौका थी।

उन्होंने ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ भारत की लड़ाई में अलग-अलग समुदायों के लोगों की भूमिका पर ज़ोर दिया।

अली ने कहा, “15 अगस्त 1947 को हमारा देश अंग्रेज़ों की गुलामी से आज़ाद हुआ। हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों, सभी ने यह आज़ादी पाने के लिए कुर्बानियां दीं।”

उन्होंने आगे कहा कि आज नागरिकों को जो आज़ादी मिली है, वह पिछली पीढ़ियों की कुर्बानियों से गहराई से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा, “इन्हीं कुर्बानियों की वजह से आज हमारे देश का हर व्यक्ति आज़ादी की हवा में सांस ले रहा है।”

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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