मध्यप्रदेश के बाद अब यूपी में गेहूं घोटाले की खबर सामने आई है। पुलिस ने रविवार को बताया कि यहां प्रोविंशियल कोऑपरेटिव फेडरेशन (PCF) के दो खरीद केंद्रों से कुल 228.764 मीट्रिक टन गेहूं गायब पाया गया, जिसकी कीमत लगभग 60 लाख रुपये है।
पुलिस ने बताया कि खरीद केंद्र के इंचार्ज समेत दो अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि इंचार्ज सेक्रेटरी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, जिला खाद्य और विपणन अधिकारी गोविंद कुमार उपाध्याय, सहायक आयुक्त (सहकारिता) अजय कुमार मौर्य और अतिरिक्त जिला सहकारी अधिकारी देवेंद्र प्रताप अग्रहरी की एक संयुक्त टीम ने 11 सितंबर को B-PACS तुलसीपुर के दो खरीद केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
एक केंद्र पर रिकॉर्ड से पता चला कि 2026-27 के दौरान 420.87 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, जिसमें से 353.759 मीट्रिक टन भारतीय खाद्य निगम (FCI) को भेजा गया था।
बाकी बचा 67.111 मीट्रिक टन गेहूं गोदाम में रखा जाना था, लेकिन निरीक्षण टीम को उसकी चाबियां नहीं दी गईं। पुलिस ने बताया कि खिड़कियों से देखने पर गोदाम खाली लग रहा था।
दूसरे केंद्र पर रिकॉर्ड से 322.600 मीट्रिक टन की खरीद का पता चला, जिसके मुकाबले FCI को केवल 160.947 मीट्रिक टन ही भेजा गया था। उन्होंने बताया कि बाकी बचा 161.653 मीट्रिक टन गेहूं गोदाम में रखा जाना था, लेकिन कोई भौतिक स्टॉक नहीं मिला।
पुलिस ने बताया कि 2,605 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आधार पर, गायब गेहूं की कुल कीमत लगभग 60 लाख रुपये आंकी गई।
पुलिस अधीक्षक मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि PCF के जिला प्रबंधक अश्वनी शुक्ला की शिकायत पर तुलसीपुर थाने में इंचार्ज सेक्रेटरी प्रकाश सिंह और केंद्र इंचार्ज महेंद्र मणि तिवारी के खिलाफ संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई। SP ने बताया कि प्रकाश सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।


