केदारताल रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत, सोमवार सुबह करीब 7:35 बजे देहरादून से हर्षिल में मिलिट्री हेलीपैड के लिए एक हेलीकॉप्टर रवाना हुआ। हेलीकॉप्टर सुबह करीब 8:10 बजे हर्षिल पहुंचा। इसके बाद, सुबह 8:35 बजे, दो NIM और 6 SDRF सदस्यों समेत कुल आठ बचाव कर्मियों को हेलीकॉप्टर से केदारताल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भेजा गया।
रविवार को, SDRF ने केदारताल ट्रेक पर फंसे आठ पर्वतारोहियों को ढूंढने के लिए भोजखरक और कच्ची ढांग के आसपास हेलीकॉप्टर से सर्च किया, लेकिन वे नहीं मिले या कोई सुराग नहीं मिला। NDRF की टीम ने भी केदारताल ट्रेक पर सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन वह कामयाब नहीं हुई। आज, सोमवार को, SDRF और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) की एक ट्रेंड टीम हेलीकॉप्टर से आखिरी जगह पर लैंड करने के लिए रवाना हुई।
NDRF और SDRF के सामने आ रही मुश्किलें
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने माना कि रविवार के सर्च ऑपरेशन के दौरान NDRF और SDRF के सामने एक बड़ी समस्या यह थी कि इलाके में गहरी खाइयां और संकरी घाटियां होने की वजह से हेलीकॉप्टर को ज़्यादा नीचे नहीं उतारा जा सका। न तो हेलीकॉप्टर और न ही अंडरग्राउंड सर्च ऑपरेशन फंसे हुए पर्वतारोहियों को ढूंढ पाया।
बता दें कि 27 अक्टूबर को 12 लोगों की टीम केदारताल ट्रेक पर गई थी। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के सात ट्रेकर्स और एक गाइड भोजखरक के पास एक बड़े एवलांच की वजह से फंस गए थे। टीम के तीन पोर्टर और एक कुक ने अपनी खोज जारी रखी और 30 अक्टूबर को सुरक्षित गंगोत्री पहुंच गए। उन्होंने ही गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों को घटना की जानकारी दी थी। 31 अक्टूबर से SDRF, NDRF और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीमें फंसे हुए ट्रेकर्स को ढूंढ रही हैं।


