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Child marriage:बाल विवाह के खात्में की लड़ाई में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान एक निर्णायक कदम है- आशा त्रिपाठी 

Child marriage:बाल विवाह के खात्में की लड़ाई में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान एक निर्णायक कदम है- आशा त्रिपाठी

कुशीनगर के साथ ही बाल विवाह के खिलाफ हमारा संगठन 25 राज्यों के 416 जिलों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है

Child marriage: जस्ट राईट फार चिल्ड्रेन (बाल विवाह मुक्त भारत) एवं मानव ‘‘सेवा’’ संस्थान सेवा गोरखपुर के सहयोग से जनपद को बाल विवाह मुक्त बनाने के संकल्प के साथ विशेष अभियान चलाया जा रहा है,

जिससे विकसित भारत बनाने की संकल्पना को पूरा किया जा सकें। देश की आधी आबादी को नजरअंदाज कर हम इस संकल्प को कभी पूरा नही कर सकते है।

उक्त बाते मानव सेवा संस्थान ‘‘सेवा’’ गोरखपर की अध्यक्षा आशा त्रिपाठी ने आयोजित प्रेस वार्ता में कही आशा त्रिपाठी ने कहा कि भारत सरकार के म्हिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के द्वारा शुरू किया बाल विवाह मुक्त भारत का संकल्प और इसी प्रयास की कड़ी में प्रारम्भ किया गया

यह अभियान हमारे बच्चों के लिए एक सुरक्षित उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं निर्णायक कदम है, बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए सबसे बड़े ‘‘संगठन जस्ट राईट फार चिल्ड्रेन’’ का सहयोगी होने के नाते विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने के दिशा में हमें मिलकर कार्य करते रहेंगे।

आशा त्रिपाठी ने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ सुप्रिम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले में जे0आर0सी0 की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसमें माननीय न्यायलय ने बाल विवाह को रोकने के लिए राज्यों एवं सभी हितधारको के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना एवं रोडमैप तैयार किया है।

वर्ष की शुरूआत में ही जे0आर0सी0 के हस्तक्षेप से राजस्थान उच्च न्यायलय ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया पंचायतों को बाल विवाह के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है,

खास कर अक्षय तृतीया के दौरान । निश्चितरूप से बल विवाह के खात्में की लड़ाई में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान एक निर्णायक कदम है।

आशा त्रिपाठी ने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक लाम्बंदी के अभियान को सफल बनाने के लिए हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास करेंगे।

गठबंधन वर्ष 2030 तक बाल विवाह के खिलाफ टिपिंग प्वांइट यानी निर्णायक बिन्दु तक पहुँचने के लिए प्रतिबध है, जिसका हमारे संस्थापक भुवन ़ऋभू ने अपनी किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन टिपिंग प्वांट टू इट चाईल्ड मैरेज में विस्तृत खाका खिंचा है।

इस के साथ ही यह जानकारी साझा किया कि बाल विवाह के खिलाफ हमारा संगठन 25 राज्यों के 416 जिलों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है।

इस कुप्रथा पर चिन्ता प्रकट करते हुए आशा त्रिपाठी ने कहा कि बाल विवाह, बाल यौन शोषण है, यह देश के श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी में सबसे बड़ी बाधा है, इससे स्वास्थ्य एवं शिक्षा का संकट पैदा होता है, इसकी शिकार अभिसप्त हो जाती है जो कि दासता की जिन्दगी जीने को मजबूर हो जाती है, इसकी स्वतंत्रता मुक्ति के रास्ते बंद हो जाते है।

इसके लिए पितृ सत्ता, गरीबी, ट्रेफिकिंग, पर्सनल लाॅ एवं रीति-रिवाज जिम्मेदार है। इससे बच्चे अपने स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, रोजगार के अधिकारों से वंचित हो जाते है।

इससे बच्चियाँ सामाजिक अलगाँव की शिकार होती है उनका बचपन उनसे छिन लिया जाता है, बच्चीयाँ जो शारिरिक एवं मानसिक तौर पर अवरिपक्व होती है और वह उनपर वयस्क की जिम्मेदारी सौप दिया जाता है, जो विवाह का मतलब नही समझती है।

इसके साथ ही बाल विवाह स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सहित जीवन के तमाम अवसर से वंचित कर दिया जाता है। जो कि हमारे संविधान में समानता, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति जैसे स्वतंत्रता के मूल्यों को पूरी तरह खिलाफ है।

आशा त्रिपाठी ने अपील किया कि केन्द्र सरकार द्वारा एवं सामाजिक संगठनों के तरफ से संचालित इस अभियान में जन सहयोग से ही इस पर पूर्ण विराम लगाया जा सकता है। जिससे की बाल विवाह को पूरी तौर पर समाप्त कर विकसित भारत का सपना साकार किया जा सकें।

Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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