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‘असम का भारत में विलय…’, अमित शाह ने गोपीनाथ बोरदोलोई के योगदान को किया याद


Amit Shah in Assam: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज असम के नागांव जिले में बटाद्रवा थान पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर बोरदोलोई नहीं होते तो असम और पूरा पूर्वोत्तर भारत का हिस्सा नहीं होता। गृह मंत्री ने यह भी दावा किया कि बोरदोलोई ने जवाहरलाल नेहरू को असम को भारत में रखने के लिए मजबूर किया था। यह बयान असम की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने वाले एक कार्यक्रम के दौरान आया।


गोपीनाथ बोरदोलोई पर शाह का बयान


अपने संबोधन में अमित शाह ने भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई को याद करते हुए कहा ‘आज मैं भारत रत्न गोपीनाथ जी को याद करना चाहता हूं। अगर वे नहीं होते तो असम और पूरा पूर्वोत्तर आज भारत का हिस्सा नहीं होता। गोपीनाथ जी ने ही जवाहरलाल नेहरू को मजबूर किया कि असम भारत में रहे।’ बता दें, बोरदोलोई असम के पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने 1947के विभाजन के दौरान असम को भारत में रखने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में शाह का यह बयान ऐतिहासिक संदर्भ को रेखांकित करता है, जहां बोरदोलोई ने मुस्लिम लीग की मांगों का विरोध किया था।


घुसपैठियों पर सख्त रुख


इस दौरान गृह मंत्री ने घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर देते हुए कहा कि असम में एक लाख बीघा से अधिक भूमि बांग्लादेशी घुसपैठियों से मुक्त कराई गई है। उन्होंने भाजपा की प्रतिबद्धता दोहराई कि पूरे देश से घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा, जैसे असम में किया गया। शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह घुसपैठियों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती है, जिससे असम की संस्कृति और पहचान को खतरा है। उन्होंने असम आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकारों ने तब कार्रवाई नहीं की, लेकिन अब भाजपा ने इसे पूरा किया।

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