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1 जनवरी से डीजल-पेट्रोल गाड़ियों से होने वाली डिलीवरी पर UP सरकार का बड़ा फैसला, ऑटो रिक्शे पर भी लगेगा बैन

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UP Vehicle Ban:  उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। 01जनवरी 2026से डीजल और पेट्रोल से चलने वाले कैब, टैक्सी और डिलीवरी वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी जाएगी। यह प्रतिबंध विशेष रूप से मेरठ जैसे शहरों में लागू होगा, जहां करीब 15हजार डीजल ऑटो रिक्शा प्रभावित होंगे और इन्हें चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा। यह कदम केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों पर आधारित है, जो प्रदूषण कम करने के लिए स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा दे रहा है।


प्रतिबंध के मुख्य प्रावधान


यह नियम NCR के उत्तर प्रदेश हिस्से में लागू होगा, जिसमें मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और शामली जैसे जिले शामिल हैं। प्रभावित वाहनों में चार पहिया वाले हल्के वाणिज्यिक वाहन (एलसीवी), हल्के माल वाहन (एलजीवी) और एन-1श्रेणी के वाहन (3.5टन तक) शामिल हैं, जो डीजल या पेट्रोल से चलते हैं। इसके अलावा दो पहिया वाले डिलीवरी वाहन, जैसे फूड डिलीवरी बाइक्स भी इस दायरे में आएंगे। ओला, उबर, रैपिडो जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियां और ई-कॉमर्स फर्में (जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट) सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, क्योंकि उनके बेड़े में ऐसे हजारों वाहन हैं। नए वाहनों की रजिस्ट्रेशन पर पूरी रोक होगी, जबकि मौजूदा वाहनों को 31दिसंबर 2025तक सीएनजी या इलेक्ट्रिक में बदलना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो वाहन सड़कों पर नहीं चल सकेंगे।


मेरठ पर विशेष प्रभाव


मेरठ में यह प्रतिबंध सबसे कड़ा असर डालेगा, जहां प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा रहता है। यहां करीब 15हजार डीजल ऑटो रिक्शा चलते हैं, जो शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का बड़ा हिस्सा हैं। इनमें से ज्यादातर को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा, क्योंकि वे प्रदूषण के प्रमुख स्रोत माने जा रहे हैं। पूरे NCR-यूपी में डीजल ऑटो पर रोक लगेगी, लेकिन मेरठ में यह संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, शहर में ओला-उबर से जुड़े करीब 5लाख से ज्यादा डीजल-पेट्रोल वाहन प्रभावित हो सकते हैं, जो ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी से जुड़े हैं। वाहन मालिकों को रूपांतरण के लिए समय दिया गया है, लेकिन कई लोगों के लिए यह आर्थिक चुनौती साबित हो सकता है।


प्रतिबंध के पीछे के कारण


यह फैसला बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है। सीएक्यूएम की रिपोर्ट्स से पता चला है कि कैब और डिलीवरी वाहन प्रदूषण में बड़ा योगदान देते हैं, खासकर सर्दियों में जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। दिल्ली-एनसीआर को जीरो-एमिशन ट्रांसपोर्ट जोन बनाने का लक्ष्य है, जिसके तहत स्वच्छ ईंधन जैसे सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसमें चरणबद्ध प्रतिबंध शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी पुराने वाहनों पर कार्रवाई को लेकर दिशानिर्देश दिए हैं, हालांकि पुराने वाहनों के मालिकों को कुछ राहत मिली है।

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