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‘भगवान सबके हैं तो निजी कैसे…’, बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर केस में SC ने पूछे तीखे सवाल

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Banke Bihari Temple Corridor Case In SC: वृंदावन के पवित्र बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भावनात्मक बहस छिड़ी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने मंदिर को निजी धार्मिक संस्था बताते हुए यूपी सरकार के अध्यादेश को चुनौती दी, जिसके तहत मंदिर का प्रबंधन एक ट्रस्ट को सौंपा गया है। दीवान ने कहा कि सरकार मंदिर के धन पर कब्जा कर रही है, जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पूछा, “जब लाखों भक्त दर्शन को आते हैं, तो कोई देवता निजी कैसे हो सकता है?” यह सवाल मंदिर की आत्मा और श्रद्धालुओं की भावनाओं को छू गया।


निजी प्रबंधन बनाम सरकारी हस्तक्षेप


श्याम दीवान ने तर्क दिया कि मंदिर का प्रबंधन समिति संभालती है, जिसमें चार गोस्वामी और तीन प्रतिष्ठित लोग तीन साल के लिए चुने जाते हैं। आखिरी चुनाव 2016में हुआ था। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश पर आपत्ति जताई, जिसमें दो व्यक्तियों के निजी विवाद में मंदिर को शामिल किया गया। दीवान ने कहा कि सरकार मंदिर के धन का उपयोग जमीन खरीदने के लिए कर रही है, जो अनुचित है। कोर्ट ने जवाब में कहा कि सरकार का इरादा धन हड़पने का नहीं, बल्कि मंदिर के विकास के लिए है। जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा, “मंदिर का पैसा आपकी जेब में क्यों जाए? इसे विकास के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा सकता?” यह सवाल भक्तों के हित और मंदिर की विरासत को लेकर गहरी चिंता को दर्शाता है।


आस्था और न्याय की जंग


सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर का प्रबंधन निजी हो सकता है, लेकिन देवता को निजी नहीं कहा जा सकता। दीवान ने तर्क दिया कि सरकार ने उनकी जानकारी के बिना आदेश हासिल किए, जो उचित प्रक्रिया का उल्लंघन है। कोर्ट ने रिसीवर नियुक्ति और अन्य याचिकाओं का जिक्र करते हुए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। यह सुनवाई न केवल मंदिर के प्रबंधन, बल्कि लाखों भक्तों की आस्था और वृंदावन की सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा का सवाल उठाती है।

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