HomeUTTAR PRADESHसुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को अल्टीमेटम, कहा

सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को अल्टीमेटम, कहा


SC On Bihar Voter List:  बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 29 जुलाई को सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने चुनाव आयोग को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए, तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगा। वहीं, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और गोपाल शंकरनारायणन एवं वकील प्रशांत भूषण याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए।


बिहार के SIR मुद्दे पर SC का जवाब


बता दें, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे संविधान के अनुसार काम करना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची की जांच करें और उन लोगों को चिह्नित करें जिनके नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं। इसके लिए 30 दिन की आपत्ति दर्ज करने की अवधि दी गई है।


कोर्ट ने विशेष रूप से याचिकाकर्ताओं से उन 15 व्यक्तियों के उदाहरण पेश करने को कहा, जिन्हें मृत घोषित कर उनकी मतदाता सूची से नाम हटाए गए, जबकि वे वास्तव में जीवित हैं। कोर्ट ने कहा ‘अगर बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, तो हम तुरंत हस्तक्षेप करेंगे।’


याचिकाकर्ताओं की दलीलें


वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि SIR प्रक्रिया से अल्पसंख्यकों और गरीब तबकों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को मतदाता सत्यापन के लिए अस्वीकार किया जा रहा है, जो मतदाताओं के लिए अनुचित है। कोर्ट ने भी इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब ये दस्तावेज पहचान के लिए मान्य हैं, तो इन्हें वोटर लिस्ट सत्यापन के लिए क्यों खारिज किया जा रहा है।


प्रशांत भूषण ने आगे कहा 65 लाख लोगों ने फॉर्म जमा नहीं किए हैं। लेकिन चुनाव आयोग कहता हैं कि वे मर चुके हैं या कहीं और चले गए हैं। जो लोग ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे खुद को कैसे शामिल करवाएँगे? उन्हें कैसे पता चलेगा कि उनका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है? इसलिए उन्हें नए सिरे से आवेदन करना होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर यह सूची नहीं थी, तो जनवरी 2025 की सूची ही शुरुआती बिंदु है।

Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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