HomeUTTARAKHANDजल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कराए जा रहे कार्यों की...

जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कराए जा रहे कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में जल संरक्षण के लिए गठित स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन अथॉरिटी (SARRA) द्वारा कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सारा द्वारा जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कराए जा रहे कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सारा को अगले एक वर्ष की कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अगले एक वर्ष में कराए जाने वाले कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करते हुए प्रत्येक कार्य की टाइमलाइन निर्धारित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर की सभी नदियों पर एक साथ कार्य करने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित नदियों पर कार्य शुरू किया जाए।

मुख्य सचिव ने चैकडैम की श्रृंखला तैयार किए जाने की दिशा में भी कार्यों की गति बढ़ाए जाने की बात कही। कहा कि टिहरी जनपद में बनायी गयी चैकडैम की श्रृंखला की तर्ज पर अन्य जनपदों में भी कार्य किया जाए। उन्होंने चेकडैम्स के मेंटेनेंस और डिसिल्टिंग को भी अपनी योजना में शामिल किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने

मुख्य सचिव ने ग्राउण्ड वाटर रीचार्ज के अंतर्गत चिन्हित कार्यों को 30 जून, 2026 तक पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नैनीताल और देहरादून में भूमिगत जल संवर्धन कार्य को अगले 2 माह में कम्पलीट कर लिया जाए। साथ ही कराए जा रहे कार्यों को जल संचय जन भागीदारी पोर्टल पर अपलोड भी किया जाए। उन्होंने सारा को अपने जनपद स्तरीय अधिकारियों को लक्ष्य निर्धारित कर जिम्मेदारी दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि जनपदों में भी जिलाधिकारी स्तर पर योजनाओं की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जाए।

बैठक के दौरान बताया गया कि उत्तराखंड में जल संरक्षण और पुननदी र्जीवीकरण को लेकर स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARRA) की पहल अब तेज़ी पकड़ रही है। “वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर” योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में नदियों, धारा-नौला और भूजल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य वैज्ञानिक पद्धति से किया जा रहा है। राज्य में अब तक 5775 जल स्रोतों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें 2664 स्प्रिंग, 1701 नौले और 1282 क्रिटिकल स्ट्रीम्स शामिल हैं। इन स्रोतों के संरक्षण और पुनर्भरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर कार्यान्वयन शुरू किया गया है। कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों में कई प्रमुख नदियों जैसे शिप्रा, गौड़ी, सोंग, नयार और पूर्वी रामगंगा को प्राथमिकता देते हुए पुनर्जीवन कार्य जारी है। सारा के तहत् स्थानीय समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर समितियों का गठन कर लोगों को जल स्रोतों के संरक्षण, पौधरोपण और जल बचत के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जैसे राष्ट्रीय संस्थानों का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है।

इस अवसर पर अपर सचिव श्री हिमांशु खुराना एवं सुश्री कहकशा नसीम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
- Advertisment -spot_img

Must Read