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हरियाणा सरकार ने आयुष्मान योजना को लेकर जारी किया निर्देश, अस्पतालों से मांगे CCTV के फुटेज; डॉक्टरों ने जताई आपत्ति

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Haryana News: हरियाणा सरकार ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत सूचीबद्ध सभी अस्पतालों को बड़ा निर्देश जारी किया है। सरकार ने कहा है कि योजना के लाभार्थियों को अगर हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) या इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती किया जाता है, तो उन्हें लगातार लाइव CCTV निगरानी में रखा जाए और इसकी लाइव फीड राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के साथ शेयर की जाए।


क्या है इस निर्देश का उद्देश्य?


ये आदेश बुधवार, 7 जनवरी को हरियाणा हेल्थ प्रोटेक्शन अथॉरिटी के CEO द्वारा जारी किया गया। आदेश के अनुसार, इसका मकसद योजना के दुरुपयोग को रोकना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है। निर्देश में कहा गया है कि वेंटिलेटर पर हों या न हों, सभी आयुष्मान भारत मरीजों की ICU और HDU में मौजूदगी और इलाज की पुष्टि के लिए कैमरे लगाए जाएं। हालांकि, इसमें यह भी कहा गया है कि कैमरे इस तरह लगाए जाएं जिससे मरीज की गरिमा और निजता बनी रहे। 


अस्पतालों को दिए गए ये निर्देश


सरकार ने अस्पतालों को तुरंत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी को रियल-टाइम CCTV लिंक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश में साफ किया गया है कि इस लाइव फीड का इस्तेमाल केवल सत्यापन, निगरानी, ऑडिट और क्लेम प्रोसेसिंग के लिए ही किया जाएगा। हरियाणा में करीब 1.8 करोड़ लोग इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजीकृत हैं। योजना के अंतर्गत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है।


IMA ने जताई अपत्ती


हालांकि, इस फैसले पर डॉक्टरों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने आपत्ति जताई है। IMA हरियाणा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय महाजन ने कहा कि ICU की लाइव वीडियो निगरानी मरीजों की गोपनीयता और मेडिकल एथिक्स का उल्लंघन हो सकती है। ICU में गंभीर हालत में मरीज होते हैं, जहां शरीर खुला हो सकता है, सर्जरी या संवेदनशील प्रक्रियाएं चल रही होती हैं। ऐसे में वीडियो रिकॉर्डिंग से डेटा लीक या दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने इसे NABH गाइडलाइंस के भी खिलाफ बताया।


किसे दी गई जिम्मेदारी


डॉक्टरों का कहना है कि ICU में भर्ती मरीज अक्सर होश में नहीं होते और वे अपनी सहमति देने की स्थिति में नहीं रहते। वहीं, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा माना गया है। सरकारी आदेश में यह जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन पर डाली गई है कि मरीजों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। आदेश के अनुसार, अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट या आयुष्मान भारत नोडल अधिकारी इसके लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। नियमों का उल्लंघन होने पर जुर्माना, योजना से निलंबन या डी-एम्पैनलमेंट तक की कार्रवाई हो सकती है। हरियाणा में फिलहाल करीब 1,300 अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हुए हैं, जिनमें लगभग 650 निजी अस्पताल शामिल हैं। 

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