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स्कूल की जर्जर छत ने छीन ली आंगन की खुशियां, झालावाड़ हादसे में अपने दोनों बच्चों को खोने वाली मां की पुकार

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Jhalawar School Accident: 25 जुलाई को राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। एक सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत का हिस्सा अचानक ढह गया, जिसमें सात मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि 27 अन्य घायल हो गए। इस त्रासदी ने न केवल कई परिवारों को तोड़ दिया, बल्कि सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए।


क्या है पूरा मामला?


दरअसल, पिपलोदी गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल में बीती सुबह बच्चे प्रार्थना सभा के लिए इकट्ठा हुए थे। लेकिन बारिश के कारण पहले से ही कमजोर इमारत की छत अचानक भरभराकर गिर पड़ी। मलबे में दबकर सात बच्चों पायल (12), हरीश (8), प्रियंका (12), कुंदन (12), कार्तिक, मीना (12) और कन्हा (6) ने अपनी जान गंवा दी। सबसे छोटा बच्चा महज छह साल का था। वहीं, इस हादसे में 28 अन्य बच्चे घायल हुए, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है।


इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे की खबर मिलते ही सभी माता-पिता स्कूल की ओर दौड़े। इसी बीच, एक मां, जिसने अपने दो बच्चों एक बेटा और एक बेटी को इस हादसे में खो दिया, दहाड़ें मारकर रोती रही। रोते-रोते उस मां ने कहा ‘मेरे दो ही बच्चे थे…दोनों चले गए, अब आंगन सूना है।’ उस मां का रोना वहां मौजूद हर किसी का दिल दहला गया।


स्कूल की लापरवाही की खुली पोल


जानकारी के अनुसार, यह हादसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। दरअसल, शिक्षा विभाग ने 14 जुलाई को सभी सरकारी स्कूलों को जर्जर इमारतों की मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पत्र जारी किया था। पत्र में साफ कहा गया था कि जर्जर छतों और दीवारों को ठीक किया जाए। साथ ही, खुले बोरवेल और बिजली के तारों की जांच हो और खतरनाक इमारतों में कक्षाएं न चलाई जाएं। लेकिन पिपलोदी के इस स्कूल में इन आदेशों की पूरी तरह अनदेखी की गई।


वहीं, जिला कलेक्टर अजय सिंह ने स्कूल स्टाफ की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए पांच कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। साथ ही. मामले की गहन जांच के लिए एक कमेटी गठित की। उन्होंने कहा ‘अगर इमारत की खराब हालत की जानकारी पहले दी गई होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था।’  

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