डिहवा से भारीडीहा व खजावां से केदारनगर को जाने वाले सड़क मरम्मत बाद फिर लगी उखड़ने
अम्बेडकरनगर। ‘न भ्रष्टाचार न अत्याचार अबकी बार भाजपा सरकार‘ उक्त नारे के बल पर 2017 में प्रदेश की सत्ता में आने वाले भारतीय जनता पार्टी के मुखिया सूबे की कुर्सी संभालते ही जीरो टालरेंस नीति को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराये थे। पहले की अपेक्षा अत्याचार में तो कमी आई है लेकिन भ्रष्टाचार रूकने का नाम नहीं ले रहा है। विगत दिनों कटेहरी विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत ग्राम पंचायत जगन्नाथपुर में पीडब्लूडी से सड़क की मरम्मत यानी गढ्डा मुक्त का कार्य दो सप्ताह पहले कराया गया था लेकिन वर्तमान में डिहवा से भारीडीहा व खजावां से केदारनगर जाने वाली सड़क का हाल बेहाल है जिसको देखने वाला कोई नहीं है। इतना ही नहीं प्रतापपुर चमुर्खा अन्तर्गत नहर की पटरी पर गड्ढा मुक्त का अभियान केवल कागजों में चलाया गया। सब मिलाकर अगर यह कहा जाए इस सरकारी धन का बंदरबांट जोरों पर है। यह तो एक बानगी है पूरे जनपद में कहीं भी मानक के अनुरूप सड़क,खड़न्जा अथवा तालाबों की खुदाई नहीं हो रही है। आईजीआरएस के माध्यम से शिकायतों के निस्तारण में जनपद का प्रशासन झूंठे निस्तारण में पहला स्थान पाकर अपनी पीठ थपथपा रहा है। अब सवाल उठना लाजमी हो जाता है कि मुख्यमंत्री जीरों टालरेंस के प्रति प्रतिबद्ध है इसके बावजूद भी भ्रष्टाचार नहीं रूक रहा है। ऐसे में सूबे के जनप्रिय मुख्यमंत्री को संज्ञान लेकर एक संसदीय कमेटी बनाकर भ्रष्टाचारी अधिकारियों की जांच कराकर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए। अन्यथा यह नारा बेईमानी साबित होगा और विपक्षी पार्टिया 2024 के लोकसभा के समय उठाये गये भ्रष्टाचार के मुद्दे को 2027 के विधानसभा चुनाव में जोर-सोर से उठायेंगे। जब कि भाजपा और उसका नेतृत्व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए नित नये-नये उपायों के माध्यम से अंकुश लगाना चाह रहा है लेकिन प्रशासनिक अमला कोई न कोई भ्रष्टाचार का रास्ता ढूंढ ही लेता है अब देखना है कि इन भ्रष्टाचारियों पर कौन सी कार्यवाही करके भ्रष्टाचार को निजात देते हुए प्रदेश में पारदर्शी सरकार का वादा पूरा करेंगे।









