Tuesday, May 5, 2026
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अधिसूचना जारी कर दिया आदेश

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Maharashtra Local Body Elections: महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (SEC) को चार हफ्ते के अंदर स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिए है। इसी के साथ कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को चार महीने के अंदर पूरा करने का समयसीमा भी तय कर दी है।


बता दें, कोर्ट का ये फैसला मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर जैसे राज्य के कई स्थानीय निकायों के लिए राहत की सांस लेकर आय़ा है। क्योंकि इन इलाकों में दो साल से ज्यादा समय से निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में शासन चला रहे हैं। 


लंबे समय से लटके हुए थे चुनाव


बता दें, साल 2022 से महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव कई कारणों की वजह से लटके हुए हैं। इसका मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट में OBC आरक्षण और वार्ड परिसीमन से संबंधित मुद्दों पर अटकी लंबित याचिकाएं हैं। इसके बाद साल 2021 में SC ने OBC आरक्षण के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ की शर्त पूरी न होने के आधार पर 27%OBC कोटा लागू करने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद साल  2022 में एक रिपोर्ट के आधार पर OBC आरक्षण को लागू करने की कोशिश की गई। लेकिन ये कोशिशें भी नाकाम हो गई।


इस बीच, राज्य सरकार ने साल 2022 में मुंबई महानगरपालिका अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों में संशोधन किया औऱ वार्ड परिसीमन का अधिकार अपने पास ले लिया गया। जिसके बाद करीब 2,486 स्थानीय निकायों में चुनाव बिना किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के प्रशासकों द्वारा संचालित हो रहे हैं। लेकिन अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।


सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला 


सुप्रीम कोर्ट ने आज महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर अपना फैसला सुनाया है। जस्टिस सूर्यकांत और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने निर्देश दिए है कि आने वाले चार हफ्ते में स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी करें। इसी के साथ ही चुनाव प्रक्रिया को चार महीने के अंदर पूरा करने होगा। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में आयोग को अतिरिक्त समय के लिए छूट दी गई है।


वहीं, चुनाव का रिजल्ट सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। कोर्ट ने अपने फैसले में बताया कि OBC आरक्षण की स्थिति साल 2022 की बंठिया आयोग की रिपोर्ट से पहले की व्यवस्था के अनुसार ही होगी। यानी OBC सीटें तब तक सामान्य श्रेणी के रूप में अधिसूचित की जाएंगी। जब तक कि ट्रिपल टेस्ट की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं। कोर्ट का कहना है कि स्थानीय निकायों में लोकतंत्र को और अधिक रोका नहीं जा सकता। इसलिए राज्य सरकार व आयोग को मिलकर ये जिम्मेदारी निभानी होगी।  

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