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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार, इस तारीख से जींद–सोनीपत रूट पर दौड़ने की उम्मीद

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Hydrogen Train in Haryana: भारतीय रेलवे में लगातार बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नई तकनीक, आधुनिक ट्रैक और पर्यावरण के अनुकूल प्रयोग अब रेलवे की नई पहचान बन चुके हैं। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जल्द ही पटरियों पर उतरने वाली है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद पहुंच चुकी है और इसके संचालन से पहले सभी जरूरी तकनीकी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।


कब से चलेगी ये ट्रेन


फिलहाल ट्रेन और उससे जुड़े हाइड्रोजन प्लांट का ट्रायल चल रहा है। लखनऊ से रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की विशेषज्ञ टीमें मौके पर मौजूद हैं। ट्रेन की मशीनों, उपकरणों और सुरक्षा सिस्टम की गहन जांच की जा रही है। सभी सेफ्टी टेस्ट पूरे होने के बाद ही ट्रेन को हरी झंडी दी जाएगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 20 जनवरी के बाद जींद से सोनीपत रूट पर चलाई जा सकती है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक तारीख तय नहीं हुई है। ट्रायल सफल रहने पर यह ट्रेन जल्द ही आम यात्रियों के लिए शुरू कर दी जाएगी।


भारत में किया गया डिजाइन


ये हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित की गई है। ब्रॉड गेज पर चलने वाली यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन मानी जा रही है। ट्रेन में कुल 10 कोच हैं और इसकी कुल पावर 2400 किलोवाट है। इसमें दो ड्राइविंग पावर कार लगी हैं, जिनमें से हर एक की क्षमता 1200 किलोवाट है। इस ट्रेन में एक बार में करीब 2500 यात्री सफर कर सकेंगे। इसकी अधिकतम गति 140 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। ईंधन के रूप में 360 किलो हाइड्रोजन से यह ट्रेन लगभग 180 किलोमीटर का सफर तय कर सकती है।


मेट्रो की तर्ज पर किया गया तैयार


इस प्रोजेक्ट पर लगभग 82 करोड़ रुपये की लागत आई है और इसके कोच चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी में बनाए गए हैं। ये ट्रेन मेट्रो की तर्ज पर तैयार की गई है। दरवाजे पूरी तरह बंद होने के बाद ही ट्रेन चलेगी और सफर के दौरान लगभग कोई शोर नहीं होगा। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली इस ट्रेन से केवल पानी और भाप निकलती है, जिससे प्रदूषण बेहद कम होता है। इस पहल को भारतीय रेलवे के हरित और भविष्य की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है। 

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