Indus Water Treaty: भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी रणनीतिक कार्रवाइयों को और तेज करते हुए एक नया मास्टरप्लान तैयार किया है, जिससे पड़ोसी देश में खलबली मची हुई है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर पाकिस्तान पर ‘वॉटर स्ट्राइक’ कर भारत अब ‘बिजली का झटका’ देने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ने सिंधु नदी बेसिन पर नई जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे पाकिस्तान की जल और ऊर्जा आपूर्ति पर और दबाव पड़ेगा।
सिंधु नदी पर नई परियोजनाएं
भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सिंधु, चिनाब और झेलम नदियों पर 12 गीगावाट की जलविद्युत परियोजनाओं की शुरुआत के लिए फिजिबिलिटी स्टडी के आदेश दिए हैं। इनमें सावलकोट (1,856 MW), पाकल दुल (1,000 MW), रतले (850 MW), और किरू (624 MW) जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड को मजबूती मिलेगी। साथ ही, चिनाब नदी पर बगलिहार और सलाल बांधों से जल प्रवाह को नियंत्रित कर पाकिस्तान को पानी की जरूरतों को भी सीमित किया जा सकता है।
पाकिस्तान का बढ़ता मुश्किल
पहलगाम हमले के बाद भारत ने न केवल जल संधि को निलंबित किया, बल्कि पाकिस्तान से सभी आयात को भी रोक लगा दिया है। अब नई जलविद्युत परियोजनाओं के जरिए भारत अपनी ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पाकिस्तान की निर्भरता को और कम करेगा। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सिंधु नदी पर भारत का नियंत्रण पाकिस्तान की कृषि, ऊर्जा और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। क्योंकि यह नदी पड़ोसी देश की जीवनरेखा के रूप में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा, “भारत का पानी अब भारत के हितों के लिए ही इस्तेमाल होगा।” यह बयान भारत की नई नीति को बताता है, जिसमें जल और ऊर्जा संसाधनों का उपयोग कर रणनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान में सियासी और सामाजिक अस्थिरता बढ़ने की भी उम्मीद है।









