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नियम कड़े, नतीजे फीके…GRAP-4 के बावजूद दिल्ली की हवा अब भी जहरीली, CAQM रिपोर्ट ने खोली पोल

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Delhi Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-4को लागू किए जाने के बावजूद प्रदूषण के स्तर में कोई कमी नहीं आई है। कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने अपनी हालिया समीक्षा में सरकारी विभागों की खराब परफॉर्मेंस को जिम्मेदार ठहराया है, जहां नियमों के पालन में कमी और समन्वय की कमी को प्रमुख कारण बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि GRAP सिर्फ समस्या के लक्षणों पर काम करता है, जबकि मूल कारणों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।


प्रदूषण का मौजूदा स्तर


बता दें, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हाल ही में 437तक पहुंच गया, जो ‘सीवियर’ कैटेगरी में आता है। कई मॉनिटरिंग स्टेशनों जैसे आनंद विहार (491), रोहिणी (484) और मुंडका (485) पर AQI 450से ऊपर दर्ज किया गया। PM2.5मुख्य प्रदूषक बना हुआ है। धीमी हवा की गति और स्थिर वातावरण के कारण प्रदूषण बढ़ा, जिसके चलते CAQM ने स्टेज-4को फिर से लागू किया। स्टेज-4के तहत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों पर प्रतिबंध, निर्माण कार्यों पर रोक, स्कूलों में हाइब्रिड मोड और मिस्ट स्प्रे सिस्टम का इस्तेमाल जैसे कदम शामिल हैं। हालांकि, इन उपायों के बावजूद AQI कई जगहों पर 370से ऊपर बना रहा, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।


क्या कहती है CAQM की रिपोर्ट?


CAQM ने सरकारी विभागों से सवाल किया कि GRAP-4के बावजूद क्यों प्रदूषण बढ़ रहा है। रिपोर्ट में MCD, DDA, दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की खराब प्रवर्तन को चिह्नित किया गया। इसमें ओपन गार्बेज बर्निंग, बायोमास बर्निंग पर रोक न लगना, अवैध इंडस्ट्रियल यूनिट्स का संचालन और सड़क खुदाई से उड़ती धूल जैसी कई समस्या शामिल हैं। दरअसल, GRAP एक इमरजेंसी फ्रेमवर्क है जो प्रदूषण के लक्षणों को दबाता है, लेकिन मूल कारण जैसे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता, अपर्याप्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्रियल उत्सर्जन को नहीं छूता। 2025में दिल्ली का औसत PM10स्तर 197माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, जो राष्ट्रीय मानक से तीन गुना ज्यादा है।


CAQM ने जियो-टैग्ड रिपोर्टिंग और इंस्पेक्शन के जरिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। MCD ने 7,023 चालान जारी किए, 34 अवैध डाइंग यूनिट्स सील कीं और 356 सर्विलांस टीमों को तैनात किया, लेकिन ये प्रयास संकट को रोकने में नाकाफी साबित हुए। दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने भी MCD, DDA और DPCC को सड़कों की मरम्मत, मैकेनिकल क्लीनिंग और डस्ट कंट्रोल के अभाव पर फटकार लगाई।

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