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IPS वाई पूरन सिंह सुसाइड केस में CM सैनी का सख्त रुख, बोले- चाहे कोई भी हो, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे

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Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आईपीएस अधिकारी वाई पूरन सिंह की आत्महत्या को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पंचकूला में बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के दौरान वाई पूरन सिंह को श्रद्धांजलि दी गई और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। सीएम सैनी ने कहा, “जैसे ही जापान में मुझे इस दुखद समाचार की सूचना मिली, मैंने तुरंत अधिकारी की पत्नी को ढांढस बंधाया और अधिकारियों को उनके साथ भेजा।”


सैनी ने विपक्ष पर साधा निशाना, न्याय का भरोसा दिलाया


मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कोई भी व्यक्ति यदि किसी को प्रताड़ित करता है, तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि ऐसे संवेदनशील मामले में राजनीति करना गलत है। “अगर परिवार के साथ अन्याय हुआ है, तो न्याय देना हमारी सरकार का कर्तव्य है और हम इससे पीछे नहीं हटेंगे,” सैनी ने दो टूक कहा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराएगी और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।


IPS की मौत के बाद सियासी हलचल तेज


आईपीएस वाई पूरन सिंह की आत्महत्या के बाद से हरियाणा में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। इसी के चलते शनिवार को प्रस्तावित हरियाणा कैबिनेट की बैठक स्थगित कर दी गई है। पहले यह बैठक दोपहर 3 बजे होनी थी, लेकिन अब इसके रविवार सुबह 9 बजे होने की संभावना है। चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री की लगातार हाई-लेवल बैठकें हो रही हैं, और वह सचिवालय में मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।


सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप, 10 अधिकारियों के नाम


वाई पूरन सिंह ने आत्महत्या से पहले 8 पन्नों का एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। नोट में पूर्व डीजीपी, एडीजीपी और एसपी रैंक के कुल 10 अफसरों को मानसिक प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इन अफसरों में डीजीपी शत्रुजीत कपूर, पूर्व डीजीपी मनोज यादव, अमिताभ ढिल्लों, संदीप खिरवार, कला रामचंद्रन, संजय कुमार, पंकज नैन, पीके अग्रवाल और आईपीएस शिबास कविराज के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। पूर्व मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद का नाम भी इस लिस्ट में है। यह मामला हरियाणा की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

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