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Dog Bite और Stray Dogs की बढ़ती समस्या…कुत्तों की नसबंदी से शेल्टर होम तक, SC ने राज्यों से मांगा पूरा डेटा

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Supreme Court: देश में फिर एक बार Stray Dogs का मुद्दा उठा। दरअसल, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने देश में अवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या और डॉग बाइट को लेकर बेहद जरूरी सुनवाई की है। सोमवार को मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को बारी-बारी से, राज्यों के नाम के Alphabetical ऑर्डर के अनुसार कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही, सभी राज्यों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है।


सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि अधिकतर राज्यों ने अपने हलफनामे तो जमा किए हैं, लेकिन उनमें जरूरी आंकड़ों की जानकारी अधूरी है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अब तक कितने कुत्तों की नसबंदी की गई है, कितने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) केंद्र स्थापित किए गए हैं और कितने शेल्टर बनाए गए हैं। इसके समाधान के रूप में सिंघवी ने सुझाव दिया कि एक चार्ट तैयार किया जाए, जिसमें प्रत्येक राज्य का डेटा साफ-साफ और व्यवस्थित तरीके से दिखाया जाए।


कुछ राज्यों ने हलफनामा अभी तक नहीं दाखिल किया


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह सामने आया कि कुछ राज्यों ने अब तक हलफनामे जमा नहीं किए हैं। रजिस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, और चंडीगढ़ ने अपने हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं। हालांकि, चंडीगढ़ के वकील ने अदालत को बताया कि उनका हलफनामा जमा किया जा चुका है, लेकिन वह रिपोर्ट में शामिल नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वह अभी पूरे मामले पर अंतिम निर्णय नहीं लेगी, बल्कि पहले यह जांचेगी कि प्रत्येक राज्य ने क्या जानकारी दी है और डेटा कितना पूरा है। अदालत ने सभी राज्यों से चेकलिस्ट आधारित रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।


सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा और आगे के दिशा-निर्देश


सुनवाई के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज का भी माहौल बना, जब सॉलिसिटर जनरल ने मजाक में कहा कि “लॉयर कोर्ट में घुस नहीं पा रहे हैं – सचमुच ‘एक्सेस टू जस्टिस’ में दिक्कत हो रही है।” अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल सभी हलफनामों की समीक्षा की जाएगी और अगली सुनवाई में इंटरवेनर्स और अन्य पक्षों की सुनवाई होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे के दिशा-निर्देश राज्यों की प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर तय किए जाएंगे।

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