Friday, May 15, 2026
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Chatgpt और Gemini को छोड़िए! AI की दुनिया में इन 5 दिग्गजों ने बनाया वर्चस्व

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Inventors Of AI:कहा जा रहा है कि आने वाला युग एआई का है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों का फोक्स इस वक्त एआई पर है। भारत में भी इस वक्त एआई समिट का आयोजन हो रहा है। जिसमें टेक दिग्गज से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि आ रहे हैं। पीएम मोदी खुद इस कार्यक्रम को करीब से देख रहे हैं।


हालांकि, आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि वो कौन दिग्गज थे जिन्होंने एआई की नींव रखी। AI को दुनिया तक पहुंचाने के लिए कई दिग्गजों ने एक अलग रास्ता दिखाया। शायद, अगर वो ना होते तो एआई इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाता। चलिए जानते हैं उनके नाम


जॉन मैकार्थी


जॉन मैकार्थी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का शुरुआती संस्थापक माना जाता है। उन्होंने 1956में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द दिया। डार्टमाउथ सम्मेलन में उन्होंने एआई का शब्द का प्रस्ताव रखा था। इसी सम्मेलन में एआई को एक नया फिल्ड बताया गया। जॉन मैकार्थी ने एआई रिसर्च के लिए एलआईएसपी भाषा तैयार की, जो आज भी रिसर्च में इस्तेमाल होती है।


जेफ्री हिंटन


जेफ्री हिंटन को डीप लर्निंग का जनक कहा जाता है। हिंटन ने आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क पर दशकों तक काम किया और कहा कि कंप्यूटर भी इंसानी दिमाग की तरह सीख सकते हैं। उन्होंने 2013में गूगल ज्वाइन किया और एआई रिसर्च को आगे बढ़ाया। हालांकि, 2023में उन्होंने गूगल को छोड़ा और एआई के खतरों पर अपनी बात रखी।


यान ली-कुन


यान ली कुन उन वैज्ञानिकों में हैं जिन्होंने डीपलर्निंग को आगे बढ़ाया। फ्रांस के यान ने 1980-90 के दशक में कॉन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क को विकसीत किया। यह तकनीक इमेज को पहचानने में काम आती है। अभी के दौर में फेस रिकॉग्निशन, मेडिकल इमेजिंग और सेल्फ-ड्राइविंग कारों में यह तकनीक इस्तेमाल होती है। उन्होंने LeNet नाम का सीएनएन तैयार किया, जो बैंकों के चेक पर लिखे अंकों की पहचान कर सकता है।


एलन ट्यूरिंग


ब्रिटेन के एलन ट्यूरिंग को आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान का जनक कहा जाता है। उन्होंने 1936एक काल्पनिक मशीन का सिद्धांत दिया, जिसे ट्यूरिंग मशीन कहा जाता है। उनका कहना था कि अगर कोई मशीन इंसान के जैसे बात करे और इंसान से अंतर न समझा जाए, तो उसे बुद्धिमान कहा जा सकता है। फिलहाल Chatgpt जैसा मॉडल इसी विचार से प्रेरित हैं।


एंड्रयू एनजी


एआई शिक्षा को दुनिया तक पहुंचाने के लिए कोर्सेरा के सह-संस्थापक और डीप लर्निंग डॉ एआई के संस्थापक के रूप में काम किया। उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा के जरिए लाखों लोगों को शिक्षित किया।            


 

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