Bhopal 90 Degree Overbridge Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज (ROB) की असामान्य 90डिग्री मोड़ वाला डिजाइन का मामला चर्चा का विषय बन गया है। इस ब्रिज की खामियों को लेकर लगातार तीखी आलोचना और मजाक उड़ाया जा रहा है। जिसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए 08इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
रेलवे ओवरब्रिज का उद्देश्य
दरअसल, भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में बना रेलवे ओवरब्रिज 648मीटर लंबा और 8.5मीटर चौड़ा है, जिसकी लागत 18करोड़ रुपये है। यह रेलवे ओवरब्रिज महामाई का बाग, पुष्पा नगर, और स्टेशन क्षेत्र को न्यू भोपाल से जोड़ने के लिए बनाया गया था। इसका उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाली देरी को खत्म करना और लगभग तीन लाख दैनिक यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया है। लेकिन ब्रिज के डिजाइन में शामिल 90डिग्री का तीखा मोड़ सुरक्षा के लिहाज से खतरा बन गया है।
जिसे सोशल मीडिया पर ‘दुर्घटना का न्योता’ और ‘इंजीनियरिंग का मजाक’ करार दिया गया। जिसके बाद से स्थानीय निवासियों ने इस डिजाइन पर कई सवाल उठाए गए। क्योंकि इतना तीखा मोड़ गाड़ियों खासकर भारी वाहनों के लिए खतरनाक हो सकता है। बता दें, भारतीय रेलवे ने अप्रैल 2024में ही इस डिजाइन की खामियों को लेकर चेतावनी दी थी। लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसे नजरअंदाज कर निर्माण कार्य जारी रखा।
CM मोहन यादव का एक्शन
इस मामले के सामने आते ही प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए थे। 28जून को जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने त्वरित कार्रवाई की। लोक निर्माण विभाग के 7इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जिनमें दो मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) जीपी वर्मा और संजय खांडे, सहायक अभियंता सोनल सक्सेना, प्रभारी कार्यकारी अभियंता शबाना रज्जाक, उप अभियंता उमाशंकर मिश्रा, उप अभियंता रवि शुक्ला और कार्यकारी अभियंता जावेद शकील शामिल हैं। इसके अलावा एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अभियंता (सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर) के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।
इस मामले में केवल इंजीनियर ही नहीं, बल्कि ब्रिज की डिजाइन तैयार करने वाली कंपनी और निर्माण एजेंसी पर भी गाज गिरी। उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। जांच में पाया गया कि डिजाइन में तकनीकी खामियां थीं और इसे मंजूरी देने में गंभीर चूक हुई। रेलवे और PWD के बीच समन्वय की कमी भी इस विवाद का एक बड़ा कारण रही। रेलवे ने दावा किया कि उन्होंने समय रहते डिजाइन की खामियों को उजागर किया था। लेकिन PWD ने इसे नजरअंदाज किया। दूसरी ओर, PWD ने दावा किया कि मेट्रो स्टेशन की निकटता और जमीन की कमी के कारण डिजाइन में बदलाव संभव नहीं था







