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2500 करोड़ के घोटाले में दिगवंत अजित पवार और सुनेत्रा पवार को क्लीन चिट, जानें क्या है पूरा मामला

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Relif To Sunetra Pawar: महाराष्ट्र के दिगवंत पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार और  उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को बड़ी राहत मिली है। सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत ने 2500 करोड़ के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला मामले में फैसला सुना दिया है।


अदालत ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। जिसमें दिगवंत अजीत पवार को क्लीन चिट मिली है। इसके अलावा सुनेत्रा पवार और अजित पावर को भी क्लीन चिट मिली है। इस बैंक और इसकी सहायक कंपनियां की अगुवाई करने वाले कई नेताओं के नाम सामने आए थे।  


अन्ना हजारे की याचिकाएं खारिज                   


जज महेश के.जाधव ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने और मामले में हस्तक्षेप करने की प्रवर्तन निदेशालय की याचिका को खारिज कर दिया है। इसके अलावा, अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे सहित 50 अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर की गई विरोध याचिकाओं को नामंजूर कर दिया। याचिका खारीज करने वाले जज का कहना है कि पहली क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ ईडी ने पहले भी इस तरह की यातिका दायर की थी, जिसे खारिज किया गया है। उस फैसले के खिलाफ ईडी की अपील फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है।


सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला


इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का 2022 का एक अहम फैसला लागू होता है। उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि यदि कोई प्रेडिक्ट या शेड्यूल्ड अपराध साबित नहीं होता है या मौजूद नहीं हैं, तो धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा आगे नहीं बढ़ सकता। इस स्थिति में ईओडब्ल्यू का मामला ही वह मूल अपराध था। चूंकि ईओडब्ल्यू ने ही मामले में कोई अपराध न होने की बात कहकर क्लोजर रिपोर्ट दी है। इसलिए कानूनी रूप से ईडी के धन शोधण केस का आधार खत्म हो जाता है। 

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