माहवारी तय होने से अनदेखी, छापेमारी के दौरान छोटे दुकानदार निशाने पर
अम्बेडकरनगर। जिले में मिलावटी पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य विभाग की टीम द्वारा निरन्तर प्रतिष्ठानों पर छापेमारी व सैम्पुलिंग की कार्यवाही की चल रही है। इसके बावजूद भी अंकुश नहीं लग पा रहा है जिसके पीछे अधिकारियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होना अहम कारण बताया जा रहा है।
ज्ञात हो कि खाद्य विभाग के अधिकारियों को शासन का निर्देश है कि कहीं भी प्रतिष्ठानों पर मिलावट खोरी न होने पाये,निरन्तर जांच सुनिश्चित की जाए और दोषियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही भी तय हो। इसके क्रम में जिले के अधिकारियों द्वारा जांच अभियान चल रहा है और जिन प्रतिष्ठानों पर मिलावट के मामले में आ रहे हैं सैम्पुलिंग की कार्यवाही भी की जा रही है। इसके बावजूद भी मिलावट खोरी रूक नहीं पा रही है। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों द्वारा जो छापेमारी हो रही है वह महज खानापूर्ति है। छोटे-छोटे दुकानदारों के प्रतिष्ठान उनके निशाने पर है वहीं जो बड़े पैमाने पर मिलावटी खोरी का कारोबार कर रहे हैं वहां तक कोई अधिकारी व कर्मचारी पहुंचना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। जिला मुख्यालय को ही लिया जाए तो यहां जितने बड़े जलपान व गृह व होटल हैं सभी जगहों पर जो भी खाद्य पदार्थ है उनमें मिलावट किया जा रहा है। तेल से लेकर मसाला व अन्य सामाग्री कोई भी शुद्ध नहीं है यह अधिकारी भी जान रहे हैं लेकिन वहां कोई छापेमारी नहीं कर रहा है। बताया जाता है कि ऐसे बड़े प्रतिष्ठानों के संचालकों से उनकी माहवारी तय है जिसके चलते वहां कभी छापेमारी नहीं की जाती है जो सैम्पुलिंग का टारगेट है वह छोटे-छोटे दुकानों से पूरा कर लिया जा रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारियों के बारे में लोगों में चर्चा है कि इन्हें अपनी जेब भरने से वास्ता है कोई मिलावटी खाद्य पदार्थ खाकर भले ही बीमार पड़कर मर जाए उनसे कोई लेना-देना नहीं है।
होटल व जलपान गृहों पर खाद्य विभाग के अधिकारियों की बरस रही है कृपा
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